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जयपुर. मुंबई के ताज होटल में 26 नवंबर को आतंकी हमले के दौरान वहां 18 घंटे तक बंधक रही शुचिता माथुर (25) जयपुर की रहने वाली है और मुंबई में आईसीआईसीआई बैंक की अधिकारी है। शुक्रवार को अपने घर जयपुर पहुंचने के बाद उसने भास्कर को बताया कि वह बुधवार शाम बैंक के काम के सिलसिले में ताज होटल गई थी।
उसने वहां भारत-इंग्लैंड का एक दिवसीय क्रिकेट मैच टीवी पर देखा और लिफ्ट से ग्राउंड फ्लोर पर पहुंची तो होटल के एक कर्मचारी ने उसे बाहर निकलने से रोकते हुए आतंकवादियों के हमले के बारे में बताया। वहां एक व्यकित की लाश पड़ी थी, जिसके पास राइफल पड़ी थी।
खिड़कियों के कांच टूटे हुए थे। होटल कर्मचारी ने उससे पिल्लरों की आड़ लेते हुए साथ चलने को कहा, जिससे वह शुचिता को पीछे के रास्ते से बाहर निकाल सके, लेकिन उसने कमरा नंबर 909 में ही लौटने का फैसला किया और राधास्वामी को याद करते हुए कुशलता की प्रार्थना करने लगी। दोपहर दो बजे गेट पुलिस ने दरवाजा खटखटाया। शुचिता ने गेट खोला तो बाहर कमांडो खड़े थे। कमरे के बाहर करीब 15-20 अन्य लोग भी थे। सीढ़ियों व कारीडोर में जगह-जगह खून बह रहा था। उस दृश्य को देखकर रुह कांप गई।
होटल की डाइनिंग टेबल के पास भी खून व कांच बिखरे थे, जो यह बता रहे थे कि अगर शुचिता खाना खाने के लिए रुकती तो वह भी जीवित नहीं बचती। शुचिता होटल से निकल कर पहले आजाद पुलिस स्टेशन गई और वहां से बांद्रा स्थित घर पहुंचते ही भगवान की पूजा की और मोबाइल को चार्ज कर माता-पिता व अन्य परिचितों को अपने सकुशल लौटने की सूचना दी। शुक्रवार सुबह बैंक पहुंची तो अधिकारियों ने सामान्य होने के लिए छुट्टी देते हुए जयपुर का एयर टिकट दे दिया तो यहां आ गई। शुचिता की छोटी बहन सलोनी ने बताया कि मां को शुचिता के बारे में घटना के दिन नहीं बताया। दूसरे दिन 6 बजे सूचना दी। रात भर उसके पापा अनिल माथुर घबराते रहे।