|
नई दिल्ली. मुंबई में हुए देश के सबसे बड़े धमाकों के बाद अपनी नैतिक जिम्मेदारी मानते हुए केन्द्रीय गृहमंत्री शिवराज पाटिल के इस्तीफे के बाद अब उनकी जगह वित्तमंत्री पी चिदंबरम को नया गृहमंत्री बनाया गया है। वित्त मंत्रालय फिलहाल प्रधानमंत्री के पास ही रहेगा। गृहमंत्री पद के लिए विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी के नाम पर भी विचार हुआ लेकिन बताया गया कि मुखर्जी इस नई ‘चुनौती’ के लिए इच्छुक नहीं थे।
गृह मंत्रालय में रह चुके हैं चिदंबरम
चिदंबरम राजीव गांधी की सरकार में आंतरिक सुरक्षा विभाग के राज्यमंत्री रह चुके हैं। वे कार्यसमिति की बैठक में विशेष आमंत्रित थे और प्रधानमंत्री की बुलाई सर्वदलीय बैठक में भी उन्हें खास तौर पर बुलाया गया। उन्होंने रविवार सुबह प्रधानमंत्री से मुलाकात कर सर्वदलीय बैठक में पार्टी के स्टैंड को लेकर चर्चा की।
चिदंबरम : समाजवाद से बाजारवाद तक का सफर
तमिलनाडु के शिवगंगा जिले के कंदानुर में 16 सितंबर 1945 को जन्मे पलानीअप्पन चिदंबरम ने चेन्नई के प्रेसीडेंसी कॉलेज से बीएससी किया। फिर मद्रास यूनिवर्सिटी से कानूनी की उपाधि लेकर हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से एमबीए किया।
बाजारवादी अर्थव्यवस्था के विरोधी : श्रम आंदोलनों के नेता के रूप में राजनीति शुरू करने वाले चिदंबरम शुरुआती दौर में कट्टर समाजवादी और बाजारवादी अर्थव्यवस्था के घोर विरोधी थे। विडंबना यह रही है कि वे देश में खुली अर्थव्यवस्था के पुरोधाओं में भी शामिल रहे।
शिवगंगा से पहला चुनाव : चिंदबरम ने 1984 में शिवगंगा से पहला संसदीय चुनाव जीता। 1989,1991,1996,1998 व 2004 में वे वहां से पुनर्निर्वाचित हुए।
कैबिनेट का सफर : सितंबर 1985 में राजीव गांधी सरकार में वे वाणिज्य उपमंत्री बनाए गए। जनवरी 1986 में कार्मिक, लोकशिकायत व पेंशन राज्यमंत्री के रूप में पदोन्नत हुए। अक्टूबर 1986 से 1989 तक वे आंतरिक सुरक्षा राज्यमंत्री रहे। नरसिंहराव सरकार में वे जून 1991 से जुलाई 1992 तक वे वाणिज्य राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रहे। 1996 से 1998 तक वे एचडी देवेगौड़ा और इंद्रकुमार गुजरात की संयुक्त मोर्चा सरकार में वित्तमंत्री रहे। 2004 में मौजूदा प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने उन्हें वित्तमंत्री बनाया और अब वे गृहमंत्री बनाए गए हैं।
कांग्रेस छोड़ी : चिदंबरम ने राजनीतिक प्रयोग करते हुए 1996 में कांग्रेस छोड़ी और तमिल मनिला कांग्रेस में शामिल हो गए। 2001 में टीएमसी छोड़कर उन्होंने कांग्रेस जननायक पेरावाई नाम से अपनी पार्टी गठित की। प्रयोग विफल रहा और उन्होंने 2004 के चुनाव के पहले अपनी पार्टी का कांग्रेस में विलय कर दिया।
विवाद :
>> अब दिवालिया हो चुकी अमेरिकी कंपनी एनरॉन के भारत में वरिष्ठ अधिवक्ता रहे।
>> प्रतिभूति घोटाले में शामिल फेयरग्रोथ में निवेश के कारण 10 जुलाई 1992 को मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा।
>> विवादित ब्रिटिश खनन कंपनी समूह वेदांत रिसोर्सेस का वित्तमंत्री बनने तक प्रतिनिधित्व।
>> अगस्त 2006 में तत्कालीन राष्ट्रपति एपीजे कलाम ने उनके खिलाफ चुनाव के समय लाभ के पद पर रहने के आरोप की जांच के आदेश दिए।