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नई दिल्ली. टेलीकॉम सेक्टर में वर्ष 2012 तक विकास जारी रहेगा। कन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्रीज (सीआईआई) और अर्नेस्ट एंड यंग की ताजा रिपोर्ट त्नइंडिया 2012 : टेलीकॉम ग्रॉथ कंटिन्यूजत्न में यह बात कही गई है। रिपोर्ट के मुताबिक टेलीकॉम क्षेत्र में निवेशकों का विश्वास बढ़ाने के लिए स्थायी नीतियों और एक नियामक वातावरण की जरूरत है।
अर्नेस्ट एंड यंग इंडिया के टेलीकॉम इंडस्ट्री लीडर प्रशांत सिंघल ने कहा कि मौजूदा वैश्विक आर्थिक वातावरण का टेलीकॉम उद्योग पर काफी कम असर होगा। इसके बावजूद वैश्विक टेलीकॉम ऑपरेटरों ने भारतीय टेलीकॉम क्षेत्र में जो रुचि दिखाई है वह उत्साहवर्धक है। इसके अलावा रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 2012 में रूरल टेलीफोनी, 3जी, वाइमैक्स और डाटा सेवाएं इस सेक्टर की बढ़ोतरी में योगदान करेंगी।
मोबाइल सेवाओं और डाटा राजस्व के मामले में भी उद्योग को बढ़ोतरी मिलती रहेगी। ग्रामीण इलाकों में नेटवर्क लगातार बढ़ता रहेगा। सिंघल ने कहा कि टेलीकॉम क्षेत्र के लोगों के सकारात्मक रुख की बदौलत 2012 में तक टेलीकॉम क्षेत्र प्रगति करता रहेगा। रिपोर्ट के मुताबिक 2012 तक टेलीकॉम उपभोक्ताओं की संख्या 69 करोड़ से 70 करोड़ के आस-पास पहुंच जाएगी। इनमें से 64 से 65 करोड़ उपभोक्ता वायरलेस ग्राहक होंगे। जबकि 4.5-5 करोड़ फिक्स्ड लाइन उपभोक्ता होंगे।
रिपोर्ट के मुताबिक ग्राहकों की संख्या बढ़ने की मुख्य वजह छोटे और ग्रामीण इलाकों में उपभोक्ताओं का बढ़ना होगा। कुल बढ़ने वाले उपभोक्ताओं में सर्कल बी और सर्कल सी से 60 फीसदी योगदान मिलेगा। इसमें कहा गया है कि स्पेक्ट्रम की कमी टेलीकॉम सेक्टर के लिए बड़ी अड़चन साबित हो सकती है।
इसके अलावा टेलीकॉम क्षेत्र में अधिग्रहण और विलय का एक और दौर आ सकता है। जैसे ही नए ऑपरेटर अपनी सेवाएं शुरू करेंगे तो प्रत्येक सर्कल में 10-12 सेवा प्रदाता हो जाएंगे। रिपोर्ट में कहा गया है कि 2010 से फिक्स्ड लैंडलाइन फोन की संख्या बढ़नी शुरू हो जाएगी क्योंकि तब तक छोटे और मध्यम उद्यमियों के अलावा घरों में भी ब्रॉडबैंड की संख्या बढ़ने लगेगी।