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आतंक से नहीं आपस में लड़ रहे हैं रॉ अधिकारी

नई दिल्ली. आतंक का मुकाबला करने वाली देश की अग्रणी एजेंसी रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ) के अधिकारी अमन के दुश्मनों से जूझने की बजाय आपसी संघर्ष में उलझे हैं। इसके अलावा भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद और गोपनीय रूप से मिलने वाले धन के दुरुपयोग से रॉ की कार्यकुशलता भी काफी हद तक प्रभावित हुई है। मुंबई में आतंकी हमलों को रोक पाने में विफलता ने इस हकीकत को फिर उजागर कर दिया है।

‘डीएनए’ की जांच में यह बात सामने आई है कि रॉ में जारी खींचतान असल में इसके मूल अधिकारियों और प्रतिनियुक्ति पर भेजे गए पुलिस अधिकारियों के बीच है। पूरे मामले के केंद्र में रॉ प्रमुख अशोक चतुर्वेदी हैं, जिन्हें अंदरूनी सूत्र गुटबाजी पसंद अधिकारी मानते हैं। चतुर्वेदी ने रॉ प्रमुख के रूप में कार्यभार संभालने के फौरन बाद नोएडा में एक फ्लैट किराए पर लिया।

इसकी साज-सज्जा पर भारी रकम खर्च की गई। नोएडा में ही चतुर्वेदी के एक और बंगले की आजकल सजावट की जा रही है। रॉ का सालाना बजट 1000 करोड़ रुपए से अधिक है और बताया जाता है कि चतुर्वेदी का इस पर एकछत्र नियंत्रण है।

बेटे का फायदा : सूत्रों ने बताया कि यूरोप में रहने वाले चतुर्वेदी के बेटे को भी रॉ के ही फंड से आर्थिक मदद उपलब्ध कराई गई जबकि यह धन खुफिया कार्यो के लिए दिया गया था।

‘सिंपल’ और ‘डिंपल’ :

चतुर्वेदी के सेक्रेटरी जेसी कपूर भी अपने बॉस से पीछे नहीं हैं। उन्होंने अपनी चार बेटियों को रॉ में नियुक्त करवाया है। इनमें दो के नाम सिंपल और डिंपल हैं। पंजाब में नाममात्र का मैदानी अनुभव लेने के बाद दोनों अब विदेश में नियुक्ति के इंतजार में हैं।

घर पर बेगारी :

चतुर्वेदी के विरोधियों का आरोप है कि रॉ प्रमुख ने अपने घर में एजेंसी के दो दर्जन कर्मचारियों को बेगारी पर लगा रखा है। इनमें कुत्ते की देखभाल के लिए दो, दो कुक, आधा दर्जन टेलीफोन ऑपरेटर और चार माली शामिल हैं।

दिल्ली दहल रही थी, साहब फिल्म देख रहे थे : इस साल 27 सितंबर को जब दिल्ली धमाकों से दहल रही थी, तब चतुर्वेदी फिल्म देख रहे थे।

भरतियों में गड़बड़ियां :

बताया जाता है कि रॉ में सीधे नियुक्त किए गए अधिकारियों ने कई प्रभावशाली अफसरों के रिश्तेदारों की बिना पारदर्शिता बरते भरती की है। इसके चलते रॉ में पदस्थ आईपीएस लॉबी से उनके मतभेद गहरा गए हैं। इसी का नतीजा है कि चतुर्वेदी के पदभार संभालने के बाद हटाए गए रॉ के एक अधिकारी ने कथित तौर पर वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों के फोन टैप किए।





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