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नई दिल्ली.मुंबई आतंकी हमले में पाकिस्तानी हाथ के बढ़ते सबूतों के बीच भारत ने राजनयिक स्तर पर पाकिस्तान के प्रति कड़ा विरोध दर्ज कराया है। इस संबंध में पाकिस्तानी विदेशमंत्री शाह महमूद कुरैशी के नाम प्रणब मुखर्जी की एक चिट्ठी इस्लामाबाद में शनिवार को पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय को सौंपी गई है।
चिट्ठी में चेतावनी दी गई है कि यदि पाकिस्तान अपनी जमीन से सक्रिय आतंकियों को कुचलने के जनवरी 2004 में किए वादे पर खरा नहीं उतरा तो द्विपक्षीय संबंधों में ठहराव आ जाएगा। चिट्ठी में चाहे राजनयिक भाषा का प्रयोग किया गया है, लेकिन इसमें मुखर्जी द्वारा शुक्रवार को कुरैशी के साथ टेलीफोन बातचीत में दी गई ‘अब बहुत हो चुका’ किस्म की चेतावनी ही दोहराई गई है।
अंतिम राजनीतिक उपाय
इस किस्म की चिट्ठी को डिमार्श कहते हैं और इसे अंतिम राजनयिक उपाय समझा जाता है। भारत की ओर से यह पहल ऐसे समय की गई है जब दोनों देशों के बीच सीमा पर तनाव रोकने के उद्देश्य से अमेरिका की ओर से सघन राजनयिक प्रयास किए जा रहे हैं।
13 दिसंबर 2001 को संसद पर हमले के बाद तत्कालीन वाजपेयी सरकार ने ऐसी ही स्थिति में ऑपरेशन पराक्रम के तहत अंतरराष्ट्रीय सीमा पर सेना तैनात कर दी थी।