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एक खामोश दस्तक मौत की

भोपाल.राजधानी में एक ऐसी बीमारी का खतरा बढ़ रहा है, जो एड्स से भी ज्यादा खतरनाक है। मेडिकल विशेषज्ञों के अनुसार यह बीमारी हेपेटाइटिस-बी है, जो कि एक वायरस से फैलती है। इसके सबसे खतरनाक पहलू यह हैं कि शरीर में इसके वायरस होने पर 10 से 20 साल तक बीमारी का पता नहीं चलता। 20 सालों से हेपेटाइटिस का टीका उपलब्ध होने के बावजूद मरीजों की संख्या में बढोतरी हो रही है।

भारत में लगभग 4.5 करोड़ लोग हेपेटाइटिस-बी से पीड़ित हैं। हाल ही में गांधी मेडिकल कॉलेज द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार हर साल विभिन्न ब्लड बैंकों से स्वेच्छिक रक्तदान करने वालों में हेपेटाइटिस-बी के 3000 और हेपेटाइटिस-सी के 500 ऐसे मरीज मिल रहे हैं, जिन्हें खुद बीमारी की जानकारी नहीं है, क्योंकि कैंप में रक्त लेने के बाद टेस्ट करने पर पता चलता है कि रक्त में हेपेटाइटिस के विषाणु मौजूद हैं। इस रिपोर्ट के बाद ही स्वास्थ्य विभाग ने तय किया है कि ब्लड बैंक अधिकारियों को जीएमसी में विशेष ट्रेनिंग के लिए बुलाया जाएगा।

बीमारी बढ़ने के कारण

-हमीदिया के गेस्ट्रोइंट्रोलॉजिस्ट डॉ. आरके जैन ने बताया कि हेपेटाइटिस-बी के मरीजों के बढ़ने का सबसे बड़ा कारण बीमारी के बारे में जागरूकता नहीं होना है। 70 फीसदी मरीज ऐसी अवस्था में आते हैं, जब उन्हें लीवर सिरोसिस या लीवर कैंसर हो चुका होता है। ऐसे में लीवर प्रत्यारोपण ही एकमात्र इलाज है, जो काफी महंगा है। सामान्य लक्षणों में ही उपचार शुरू हो जाए तो मरीज को बचाया जा सकता है। डॉ. जैन ने बताया कि हेपेटाइटिस-बी का टीका बहुत प्रभावशाली है। इसकी अनिवार्यता से 100 फीसदी बीमारी पर काबू पाया जा सकता है।

लेकिन जागरूकता की कमी के कारण प्रदेश में टीकाकरण की स्थिति बहुत खराब है। वर्तमान में राजधानी और आसपास के लगभग 600 मरीजों को लीवर प्रत्यारोपण की आवश्यकता है।





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