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भोपाल. भारत सरकार ने देश में ऐसे आदर्श विद्यालयों का जाल बिछाने की योजना बनाई है, जिनकी पढ़ाई का स्तर तथा सुविधाएं केंद्रीय विद्यालयों के समान होंगी। पहले चरण में ऐसे ढाई हजार स्कूल स्थापित किए जा रहे हैं, जिसके लिए राशि स्वीकृत हो चुकी है और अब केंद्र को राज्य सरकारों के प्रस्ताव का इंतजार है।
केंद्र से हाल ही में राज्य सरकारों को उक्त आशय का पत्र भेजा गया है, जिसमें आदर्श स्कूल की योजना का विवरण भी दिया गया है। योजना के तहत ग्यारहवीं पंचवर्षीय योजना में 12 हजार 750 करोड़ की राशि आवंटित की गई है। सन 2008-09 के बजट में इनके लिए 650 करोड़ की राशि उपलब्ध करा दी जाएगी।
राज्य सरकारों को इसके लिए 15 दिसंबर तक आवेदन भेजना होंगे। योजना के पहले चरण के विद्यालय शैक्षणिक रूप से पिछड़े ब्लॉक में खोले जाएंगे। दूसरे चरण में पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप के तहत ऐसे 2500 और विद्यालय स्थापित किए जाएंगे। शेष एक हजार के लिए अभी नीति तय की जानी है।
कैसे होंगे स्कूल
इन स्कूलों का स्तर केंद्रीय विद्यालयों के समान होगा, जिनमें उचित छात्र-शिक्षक अनुपात, स्तरीय पाठ्यक्रम रहेगा। साथ ही वहां के अच्छे नतीजों पर खासतौर से ध्यान केंद्रित किया जाएगा। इनमें 25 विद्यार्थियों पर एक शिक्षक रहेगा तथा प्रत्येक कक्ष की क्षमता कम से कम 30 विद्यार्थियों की रहेगी। इन स्कूलों में विद्यार्थियों को स्वास्थ्य संबंधी शिक्षा भी दी जाएगी। अधिक जोर विज्ञान, गणित और अंग्रेजी पर रहेगा। साथ ही संगीत तथा कला की शिक्षा के लिए भी वहां शिक्षक रखे जाएंगे। वहां पढ़ाई में कमजोर विद्यार्थियों के लिए ब्रिज कोर्स संचालित किए जाएंगे।
मैदानी भ्रमण तथा शैक्षणिक टूर इन स्कूलों के पाठ्यक्रम का हिस्सा रहेंगे। स्कूलों में एडमीशन के लिए स्वतंत्र प्रवेश प्रक्रिया रखी जाएगी। इसी आधार पर यहां के स्टाफ का चयन भी किया जाना है। स्कूलों के लिए जमीन का चयन तथा आवंटन राज्य सरकार की जिम्मेदारी होगी। प्रति संस्थान कम से कम 10 एकड़ जमीन की अनिवार्यता है। जिस स्थान पर जमीन की बेहद कमी हो वहां कम से कम पांच एकड़ जमीन अनिवार्य रहेगी।
राज्य सरकार ही तय करेगी कि उसे स्कूल किस शिक्षा मंडल से संबंधित रखना है। स्कूल में पढ़ाई का माध्यम राज्य सरकार तय करेगी। यदि स्थानीय बोली को माध्यम बनाया जाता है तो केंद्र सरकार नौवीं से 12वीं तक का स्कूल खोलेगी, किंतु अंग्रेजी माध्यम होने पर छठवीं से 12वीं कक्षा तक का स्कूल खोला जाएगा। राज्य सरकार पर यह दायित्व होगा कि वह ऐसे स्कूल की सतत तौर पर निगरानी करे। इसके लिए किसी स्वतंत्र एजेंसी की मदद भी ली जा सकती है।
समानांतर समिति करेगी संचालन
इन स्कूलों का संचालन केंद्रीय विद्यालय संगठन की ही तरह एक समानांतर समिति करेगी। 11वीं पंचवर्षीय योजना में केंद्र तथा राज्य इस स्कूल के लिए क्रमश: 75 तथा 25 फीसदी राशि का वहन करेंगे। 12वीं योजना में यह आंकड़ा 50-50 फीसदी हो जाएगा। केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि नए भवन की कमी होने पर किसी मौजूदा स्कूल को भी आदर्श स्कूल में तब्दील किया जा सकता है। इसके लिए आश्रम स्कूलों को प्राथमिकता दी जाएगी।