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पेयजल व नियमन के बाद आतंकवाद बना बड़ा चुनावी मुद्दा

जयपुर. मुंबई में आतंकवाद की आग भले ही बुझ चुकी है, लेकिन अब उसकी आंच राजस्थान के विधानसभा चुनाव में महसूस की जाने लगी है। आतंकी घटना के दूसरे ही दिन दोनों बड़े दलों के बड़े राजनीतिज्ञों ने आतंकवाद पर राजनीति नहीं करने की बात कही थी, लेकिन मुंबई को आतंकियों से मुक्त कराने के बाद, जयपुर के प्रत्याशी इस घटना को अपने-अपने तरीके से भुनाकर वोट देने की अपील करते दिखाई दिए।

जयपुर की सभी सीटों के चुनाव प्रचार में अब तक दो प्रमुख मुद्दे—पानी और जमीनों का नियमन छाए हुए थे, लेकिन अब तीसरा बड़ा मुद्दा आतंकवाद बनकर उभरा है। शनिवार को शहर में हुई कई बड़ी सभाओं में स्टार प्रचारक भी आतंकवाद को भुनाने में पीछे नहीं रहे। चाहे छोटे परदे की चर्चित ‘तुलसी’ (स्मृति ईरानी) हों या पूर्व क्रिकेटर-सांसद नवजोत सिंह सिद्धू, गृह राज्यमंत्री शकील अहमद अथवा भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रकाश जावडेकर।

भाजपा के स्टार प्रचारक और प्रत्याशी जहां 10 आतंकियों को ही केन्द्र सरकार पर भारी पड़ने की बात कहते रहे, तो कांग्रेस के प्रचारक बड़े आतंकवादी हमले का जवाब झुकने की बजाए गोली से देने की बात कहकर मतदाताओं में जोश फूंकते नजर आए।

आतंकवाद के नाम पर यूं मांग रहे हैं वोट

भाजपा प्रत्याशी

कहते हैं कि केन्द्र सरकार आतंकवाद को रोकने में नाकामयाब है। उनके राज में सुरक्षा एजेंसियां अपना काम पूरी तरह अंजाम नहीं दे पा रही। इस साल कई आतंकी घटनाओं के बावजूद संसद हमले के आरोपी अफजल को फांसी देने में ढुलमुल रवैया अपनाया जा रहा है और संतों को कटघरे में खड़ा कर रहे हैं।

कांग्रेस प्रत्याशी

कहते हैं कि कांग्रेस सरकार ने आतंकियों के आगे घुटने नहीं टेके और गोली का जवाब उन्हीं के अंदाज में दिया। जबकि भाजपा शासनकाल में हुई आतंकी घटनाओं ने देश को शर्मसार किया। कंधार विमान अपहरण कांड और 2001 में संसद हमले के दौरान केंद्र में भाजपा की सरकार थी। इधर राज्य की भाजपा सरकार ने किसानों और निदरेष लोगों पर गोलियां चलाई हैं।

सुरक्षा का मुद्दा सभी जगह राज्यों से जुड़ा है। इस पर शुरू से ही सख्ती बरतने की जरूरत थी, जो कभी नहीं दिखाई दी। अब मतदाताओं को इसमें उलझने की जरूरत नहीं। सिर्फ आतंकवाद के नाम पर क्षेत्र की समस्याओं को नहीं तौला जाना चाहिए। —प्रो. आरडी गुर्जर, राज.विवि

आंतरिक सुरक्षा का जिम्मा तो राज्य सरकारों पर है, लेकिन आतंकी घटनाओं के तार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जुड़े होते हैं, इसलिए पहली जिम्मेदारी तो केन्द्र सरकार की बनती है। इसके बाद राज्य सरकार उस घटना से कैसे निपटती है, उसके दूसरे दुष्परिणामों को रोकने में कहां तक सफल होती है। प्रो. मधुकर श्याम चतुर्वेदी, राज. विवि





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