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नए समीकरणों ने बिगाड़ा चुनावी गणित

अजमेर (उत्तर) विधानसभा क्षेत्र से मैदान में उतरे भाजपा प्रत्याशी वासुदेव देवनानी की राह नए समीकरणों के बाद मुश्किल हो गई है। समीकरण इस मायने में कि एक तो, कांग्रेस प्रत्याशी श्रीगोपाल बाहेती ने देवनानी की कमजोरियों को भुनाने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है। दूसरा यह कि, भाजपा के परंपरागत मतों में बनी बिखराव की स्थिति को दिन-प्रतिदिन बढ़ावा मिलता जा रहा है। हालांकि देवनानी की तैयारी भी कम नहीं है। संघ पूरी तरह जहां देवनानी के साथ खड़ा है, वहीं भाजपा बाहेती के यूआईटी अध्यक्ष रहने के दौरान हुई अनियमितताओं को जनता के बीच ले जाने की तैयारी कर रही है।

जातिगत वोटों की बदली गणित भी परिणाम को प्रभावित करेगी। परिसीमन के बाद चंदबरदाई नगर, अजय नगर, आशागंज समेत कई इलाके अब सुरक्षित सीट में चले गए। देवनानी परंपरागत मतों का बिखराव रोकने में जुटे हुए हैं। बाहेती भी समाज के परंपरागत वोट अपने पक्ष में करने के लिए दिनरात एक किए हुए हैं।

जमीनी संघर्ष में कांग्रेस के चुनावी मुद्दे भी कुछ कम नहीं हैं। कांग्रेस अजमेर शहर में आईआईटी की स्थापना, ट्रीटमेंट प्लांट और 24 घंटे में पानी की सप्लाई दिए जाने का वादा कर रही है। भाजपा इस समय बड़ी चुनावी सभा करवाने की तैयारी में है। इससे पहले देवनानी के समर्थन में पूर्व अध्यक्ष वैंकया नायडू सभा कर चुके हैं, लेकिन अपेक्षा के अनुरूप भीड़ नहीं जुटी। कांग्रेस प्रत्याशी के समर्थन में बड़े नेता की कोई चुनावी सभा नहीं हुई है।

कांग्रेस ताकत

>> सरल व्यवहार और सहज उपलब्धता >> वैश्य वर्ग का समर्थन >> कार्यकर्ताओं का मजबूत नेटवर्क

कमजोरी >> विधायक रहे, लेकिन बड़ा विकास कार्य नहीं >> यूआईटी अध्यक्ष रहने के दौरान खास वर्ग को फायदा >> सिंधी कार्यकताओं का असहयोग

भाजपा ताकत

>> सिंधी वर्ग की लामबंदी >> पार्टी के परंपरागत मत >> महिला इंजी. कॉलेज खुलवाना उपलब्धि

कमजोरी>> समर्पित कार्यकर्ताओं का थोड़ा अभाव >> अजमेर को आईआईटी नहीं मिली >> परंपरागत मतों के खिसकने का खतरा बना हुआ है।





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