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Chhattisgarh
Raipur Raipur समाप्ति का समय जैसे-जैसे नजदीक आ रहा है, वैसे-वैसे नए कुलपति को लेकर अटकलें तेज होने लगी हैं। विश्वविद्यालय परिसर में आजकल यही चर्चा का विषय बना हुआ है कि अगले कुलपति कौन होंगे। उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ विश्वविद्यालय अधिनियम 1973 में 2002 को संशोधन कर यह प्रावधान किया गया कि 65 वर्ष की आयु पूर्ण कर चुके व्यक्ति कुलपति का पद धारण नहीं कर सकेंगे। वर्तमान कुलपति डा. लक्ष्मण चतुर्वेदी 7 अप्रैल 2009 में 65 वर्ष के हो रहे हैं, जबकि चार वर्षों का उनका कार्यकाल 13 मई 2009 को समाप्त होगा।
इस प्रकार उसके पहले नये कुलपति का चयन आवश्यक है। यदि कोई चयनित नहीं होता है, तो अधिनियम के प्रावधान अनुसार रेक्टर डा. अवधराम चंद्राकर प्रभारी कुलपति हो जाएंगे। 13 मई 2009 को चार साल पूरा होते तक उनकी उम्र ज्यादा हो जाएगी ।
विश्वविद्यालय परिसर में इस बात की चर्चा आज जोरों पर है कि डा. चतुर्वेदी के बाद अगला कुलपति कौन होगा। डा. चतुर्वेदी अपने उत्तराधिकारी का निर्धारण भी कर सकते हैं। उनकी पसंद में डा. अवधराम चंद्राकर, डा. प्रोमिला सिंह, डा. रोहिणी प्रसाद, डा. केएल तिवारी एवं डा. आरपी दास का सबसे ऊपर चल रहे हैं। यदि 8 दिसंबर को सरकार बनती है, तो वर्तमान रेक्टर डा. चंद्राकर का नाम सबसे ऊपर माना जा रहा है।
जानकारों के मुताबिक चूंकि वर्तमान सरकार में एक प्रभावशाली मंत्री के निकट संबंधी है। डा. प्रोमिला सिंह को कुलपति का विश्वसनीय एवं निकट होने का लाभ मिल सकता है। डा. दास को उड़ीसा के प्रभावशाली सांसद, जो कि छत्तीसगढ़ के अनेक कार्यों से जुड़े हैं, का समर्थन प्राप्त है। वे डा. चतुर्वेदी के प्रति अपनी प्रतिबद्घता के लिए जाने भी जाने जाते हैं। डा. रोहिणी प्रसाद वर्तमान में छात्र कल्याण अधिष्ठाता हैं।
ज्ञातव्य हो कि डा. चतुर्वेदी भी बनारस विश्वविद्यालय में इसी पद पर थे। वैसे भी डा. प्रसाद को बहुजन समाज पार्टी का जबरदस्त समर्थन है, जरूरत पड़ी तो बसपा सुप्रीमो भी उनके लिए प्रयास कर सकती है। डा. तिवारी कुलपति डा. चतुर्वेदी के विद्यार्थी जीवन से जबलपुर के मित्र हैं, उनके पूर्व में कांग्रेस के एक कद्दावर नेता से निकट संबंध था, किंतु डा. चतुर्वेदी की मित्रता के चलते उन्होंने उस नेता से भी दूरी बना ली है।
इस प्रकार कुलपति के खेमे में खास सिपहसलाहकार आपस में जोर आजमाइश में लगे हैं। यदि 65 वर्ष की आयु को ध्यान में रखा जाए तो 6 अक्टूबर 2008 के पहले नए कुलपति की प्रक्रिया शुरू हो जानी थी लेकिन कुलपति डा. चतुर्वेदी ने अपने संपर्कों के चलते ऐसा नहीं कि या है। वैसे भी डा. चतुर्वेदी का कार्यकाल उम्र सीमा के चलते एक माह पूर्व ही समाप्त हो जाएगी।