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बच्चों का व्यक्तित्व निखारने पर जोर

रायपुर. कोई बच्च यदि ड्राइंग में रुचि रखता है तो घर पर उसे रोज एक घंटा प्रैक्टिस के लिए वक्त देना। इतना ही नहीं, किसी की रुचि यदि किसी एक खेल में है, तो उसे भी रोज खेलने की अनुमति देना, वो भी बिना किसी रोकटोक के। ऐसे मामले अभिभावक तथा बच्चों के बीच बढ़ने लगी हैं। अभिभावक इसे व्यक्तित्व निखार के लिए जरूरी मानने लगे हैं।

पढ़ाई के बीच यदि बच्च अपना मनचाहा काम करना चाहता है तो करने देते हैं बल्कि उनकी एक्टिविटी के लिए समय तय हैं, ताकि उनकी पर्सनैलिटी में निखार आए। सदरबाजार निवासी मंजू बागड़ी ने बताया कि पांचवीं में पढ़ने वाला उनका बेटा रोज एक घंटा पेपर कटिंग आर्ट का अभ्यास करता है। अब तक वो बहुत अच्छी-अच्छी डिजाइन बनाने लगा है। उसने भले ही किसी कंपीटिशन में हिस्सेदारी नहीं किया है लेकिन उसकी इस कला के बारे लोगों को बताते हुए गर्व होता है।

प्रतियोगिता बढ़ गई है

बहुत से अभिभावक इस बात को मानने लगे हैं कि हर क्षेत्र में प्रतियोगिता बढ़ गई है, इसलिए बच्चों को पढ़ाई के साथ-साथ दूसरी चीजें भी आनी चाहिए। अहमदजी कालोनी की शीला गुप्ता ने बताया कि उनकी 11 साल की बेटी बहुत अच्छा ड्राइंग करती है। इस कला में उसकी रुचि देखकर उसे परिवार के सभी सदस्य बढ़ावा देते हैं। कंपीटिशन बढ़ जाने के कारण पढ़ाई के अलावा इस तरह की एक्टिविटी बच्चों को आनी ही चाहिए। तात्यापारा की रोशनी दुबे ने बताया कि उनके दोनों बच्चे डिजाइनर लिफाफे तथा ग्रिटिंग बनाने में रुचि लेते हैं। जब भी वक्त मिलता है वे ये चीजें बनाने लग जाते हैं। ऐसा नहीं है कि आगे चलकर इन्हें इस तरह का कोई व्यापार करना है, लेकिन यदि बच्चों की रुचि है, तो पेरेंट्स को ये सब करने की अनुमति बच्चों को देनी चाहिए।

समय से जल्दी बड़े

कुछ अभिभावकों का मानना है कि वर्तमान में बच्चे समय से जल्दी बड़े हो रहे है। इसका मतलब वे उम्र के हिसाब से ज्यादा समझदार और मेहनती होने लगे हैं। कुशालपुर निवासी विनिता सरकार ने बताया कि जब हम बच्चे थे तो सिर्फ पढ़ाई में ही ध्यान देते थे। उस वक्त इतनी समझ भी नहीं होती थी, लेकिन अभी के बच्चे बहुत समझदार हो गए हैं। एक बार में उनका दिमाग अलग-अलग काम कर लेता है। यही कारण है कि अभिभावकों के न कहने पर भी बच्चे अपने आप पढ़ाई के साथ-साथ किसी भी क्रियेटिविटी काम से जुड़ने लगे हैं। हाउसवाइफ आरती छाबड़िया ने बताया कि बहुत सारी सुविधाएं मिलने के कारण बच्चे एक साथ बहुत सारी एक्टिविटी में ध्यान देते हैं। यही नहीं वे परफेक्ट काम भी करते हैं। उनके पांच तथा सात साल के दोनों बच्चे रंगोली, ड्राइंग के साथ क्राफ्ट बनाने में माहिर हैं।

प्रतियोगिताएं बढ़ गई हैं इसलिए अभिभावक चाहते है कि बच्चे पढ़ाई के साथ दूसरी कलाओं में भी ध्यान दे। कुछ बच्चे, जो सिर्फ शौकिया तौर पर ऐसी एक्टिविटी से जुड़ते हैं। अभिभावक खुद बच्चों को बढ़ावा दे रहे हैं क्योंकि वर्तमान में फैमिली प्लानिंग के कारण एक या दो ही बच्चे होने लगे हैं और इसलिए अभिभावक बच्चों में ध्यान देने लगे हैं। पढ़ाई के अलावा दूसरी एक्टिविटी से जुड़ने पर बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ता है, साथ ही व्यक्तित्व में निखार व ज्ञान में भी वृद्धि होती है।

ईला रोहतगी, मनोवैज्ञानिक तथा डायरेक्टर, बेसिक प्ले स्कूल





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