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Chhattisgarh
Raipur Raipur रायपुर.
बच्चे को स्कूल छोड़ना हो, या घर के किसी बुजुर्ग को अस्पताल ले जाना हो। दूसरे शहर से आए किसी मेहमान को स्टेशन पहुंचाना हो या घर के लिए महीने भर की शापिंग करनी हो..। इन सबके लिए महिलाएं घर के किसी सदस्य पर निर्भर नहीं रही। इस तरह के काम वे खुद करने लगी हैं। घर संभालने की जिम्मेदारी के साथ-साथ अब बाहर के छोटे-बड़े काम निपटाने की जिम्मेदारी भी उन्हीं पर है।
अधिक महिलाओं ने इस जिम्मेदारी को पूरा करने कार ड्राइव सीख चुकी हैं और कुछ सीख भी रही हैं। अब महिलाएं न केवल बाहरी काम निपटाने आत्मनिर्भर हो चुकी हैं। यही नहीं कार सीख चुकी महिलाओं के पास पर्सनल कार भी है और वे काफी बेहतर तरीके से ड्राइव करती हैं।
महिलाओं के लिए कार
संयुक्त परिवार साथ रहने पर काम भी बहुत होता है। ऐसे में कब किस चीज की जरुरत पड़े और उसे लेने बाजार जाना पड़े, कहा नहीं जा सकता। ऐसे में कार हो तो कहीं भी आना-जाना किया जा सकता है। समता कालोनी की हेमलता ने बताया कि वे पिछले एक साल से कार चला रही हैं क्योंकि दोपहिया वाहन में एक साथ कोई भी काम नहीं हो सकता। इसमें ज्यादा सामान भी नहीं आता इसलिए कार सीखना शुरु किया। वे महिलाओं की कार ड्राइविंग को फैशन नहीं मानती क्योंकि ये जरुरत है। घर पर एक कार सिर्फ महिला सदस्यों के लिए है। जिसे महिला मेंबर ही उपयोग करती है। बाकी मेंबर के लिए अलग-अलग कार है।
ढ़ेर सारा सामान
हाउसवाइफ सुरभि अग्रवाल का कहना है कि कार से लंबी दूरी जल्दी तय की जा सकती है। इससे ज्यादा थकान भी महसूस नहीं होती। वे बहुत सालों से कार चला रही हैं। कई बार बच्चों या फिर घर के किसी भी सदस्य के साथ मार्केट जाना होता है। ऐसे में मुमकिन नहीं है कि टू व्हीलर में सभी जाए। कार से जाने पर एक साथ पूरा काम हो जाता है। कार तो आज की जरुरत है। इसे फैशन से जोड़ना सही नहीं। ट्रैफिक में भी फंसने पर किसी तरह का कोई डर नहीं रहता। बल्कि कार में सुरक्षित महसूस होता है।
आसानी से चलता है
फैमिली बिजनेस में मदद कर रही अनुषा सिंधानिया ने बताया कि जब वे 18 साल की भी तब से कार चला रही हैं। बहुत पहले टू व्हीलर चलाया करती थी, लेकिन कार में सेफ महसूस होता है और जल्दी किसी भी जगह पहुंच सकते हैं। आफिस जाने के लिए वे कार का ही इस्तेमाल करती हैं। हाउसवाइफ नीरजा देव ने बताया कि धूप, बारिश और सबसे अधिक धूल से बचाव होता है। टू व्हीलर में यदि जाए तो एक साथ बाहर का पूरा काम निपटाना मुश्किल होता है, जबकि कार में ऐसा नहीं है। कार से मार्केट जाने पर स्किन की सुरक्षा भी होती है और कहीं भी जल्दी पहुंच जाते है।
महिलाएं अच्छी कार ड्राइवर
ड्राइविंग ट्रेनिंग सेंटर के संचालकों की माने तो महिलाएं अच्छा कार चलाती हैं। पचपेड़ीनाका स्थित एक ड्राइविंग ट्रेनिंग स्कूल के डायरेक्टर विकास नामदेव ने बताया कि महिलाएं अच्छा कार चलाती हैं। पिछले कुछ सालों से कार सीखने में महिलाओं की संख्या बढ़ी हैं। जो कामकाजी या बिजनेस करने वाली महिलाएं है अब सिर्फ वे ही गाड़ी नहीं चलाती, बल्कि हाउसवाइफ भी चला रही है। वल्लभ नगर स्थित एक ड्राइविंग ट्रेनिंग स्कूल के डायरेक्टर अरिहंत निगम ने बताया कि जरुरत पड़ने के कारण ही महिलाएं कार चलाना सीख रही हैं, बल्कि महिलाएं बहुत अच्छी तरह से ड्राइव करती हैं। हालांकि ड्राइविंग कोर्स 15 दिनों का होता है लेकिन कई बार एक सप्ताह में ही महिलाएं सीख लेती हैं। महिलाओं की बढ़ती संख्या के कारण उन्हें घर पहुंच सेवा के माध्यम से सिखाया जा रहा है।