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अर्धवार्षिक परीक्षाएं परेशानी के साथ शुरू

उज्जैन. सरकारी स्कूलों में अर्धवार्षिक परीक्षा का सिलसिला सोमवार से शुरू हुआ। उज्जैन विकासखंड के प्राइमरी व मिडिल स्कूलों के करीब 40 हजार परीक्षार्थी इसमें शामिल हुए। अधिकतर स्कूलों में उत्तर पुस्तिकाओं की कमी के कारण परीक्षार्थियों को परेशान होना पड़ा तो जहां एक भी पुस्तिका नहीं पहुंच सकी, वहां से विद्यार्थी परीक्षा दिए बिना ही लौट आए।

राज्य शिक्षा केंद्र ने इस सत्र से प्राथमिक व माध्यमिक के परीक्षार्थियों के लिए सभी विषयों की संयुक्त उत्तर पुस्तिकाएं (बुकलेट) उपलब्ध कराई हैं। सोमवार सुबह परीक्षा शुरू होने के समय कई परीक्षार्थियों को ये बुकलेट उपलब्ध नहीं हो सकी। स्कूल प्रमुखों को परीक्षार्थियों की निर्धारित संख्या से कम बुकलेट मिलने के कारण यह परेशानी आई।

इसके चलते परीक्षार्थियों की परीक्षा के लिए सामान्य उत्तर पुस्तिकाओं की व्यवस्था करनी पड़ी। केंद्र ने पहली बार बुकलेट के माध्यम से परीक्षा लेने की व्यवस्था की है। इससे पहले यह होता था कि अलग-अलग विषयों के लिए बच्चों को अलग-अलग पुस्तिकाएं देनी पड़ती थीं। इस साल से सभी विषयों की संयुक्त उत्तरपुस्तिका तैयार कराई गई है।

छटी के परीक्षार्थी हुए परेशान- कक्षा छटी के परीक्षार्थी बुकलेट न मिलने की समस्या से परेशान हुए। आलम यह रहा कि कई स्कूलों में बहुत कम उत्तर पुस्तिकाएं ही पहुंच सकीं। स्कूल प्रधानों को ताबड़तोड़ नई व्यवस्था करनी पड़ी।

परीक्षा आगे बढ़ाई- जिले के कई स्कूलों में छटी कक्षा की एक भी उत्तर पुस्तिका नहीं पहुंच सकी। प्रधान अध्यापकों के पास कोई निर्देश भी नहीं थे कि पुस्तिकाएं कम पड़ने पर वैकल्पिक व्यवस्था क्या करना है इसलिए उन्होंने जिस कक्षा की पुस्तिकाएं नहीं मिलीं, उनकी परीक्षाएं आगे बढ़ा दी हैं।

इसलिए हुई गड़बड़ी

१. कक्षा छटी के बच्चों की संख्या राज्य शिक्षा केंद्र मुख्यालय पर शुरुआत में पिछले साल के हिसाब से जानकारी भेजी गई थी लेकिन इस साल छटी में दर्ज बच्चों की संख्या अधिक हो गई। इससे पूरे जिले में करीब २४ हजार छात्र संख्या का अंतर आ गया।

२. राज्य शिक्षा केंद्र द्वारा उत्तर पुस्तिकाएं सीमित संख्या में भेजी गईं और इन्हें परीक्षा शुरू होने से हफ्तेभर पहले ही उपलब्ध कराया गया। जिस समय पुस्तिकाएं पहुंचीं शिक्षा विभाग के अधिकारी निर्वाचन में व्यस्त थे। इससे पुस्तिकाएं समय पर सभी स्कूलों तक नहीं पहुंच सकीं।

३. पुस्तिकाएं ऐनवक्त पर मिलने से जल्दबाजी में कहीं कम तो कहीं अधिक पुस्तिकाएं पहुंच गईं। इससे भी परेशानी की स्थिति बनी। पुस्तिकाएं एक माह पूर्व ही पहुंच जातीं तो यह समस्या उत्पन्न नहीं होती।

मुख्यालय से जितनी पुस्तिकाएं आईं, उन सभी को वितरित करा दिया था। छटी कक्षा की पुस्तिकाएं कम मिलीं इसलिए कुछ जगह समस्या हुई। जहां पुस्तिकाएं नहीं पहुंच सकी हैं वहां अलग से उत्तरपुस्तिकाएं उपलब्ध कराकर परीक्षा ली जाएगी।

- भरत व्यास, जिला परियोजना समन्वयक, राज्य शिक्षा केंद्र, उज्जैन





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