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एटीएस प्रमुख करकरे की पत्नी ने गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की कथित मदद ठुकराई और अब स्व. मेजर उन्नीकृष्णन के पिता ने केरल के मुख्यमंत्री को जिस तरह से बाहर का रास्ता दिखाया उसे आम भारतीयों की भावनाओं की अभिव्यक्ति ही कहा जा सकता है। नेताओं के प्रति मुंबई समेत देशभर में भारी गुस्सा है और ये गुस्सा बेवजह नहीं है। पिछले कुछ दिनों से नेताओं के बयान ही इस गुस्से को और भड़का रहे हैं। एक बानगी..
लिपिस्टिक लगाकर प्रदर्शन समझ से परे?
भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा नेताओं के प्रति जो गुस्से की बात कही जा रही है वह दिखावा है। लिपिस्टिक पाउडर लगाकर सूट पहनकर प्रदर्शन का यह कैसा तरीका है। नकवी ने तो प्रदर्शनकारियों की तुलना अलगाववादियों से करते हुए कहा कि इनकी जांच होना चाहिए।
सिर्फ नेता को दोष देना उचित नहीं
राकांपा नेता और केंद्रीय मंत्री प्रफुल्ल पटेल के सुर भी जनता के गुस्से से बिगड़ गए। पटेल साहब ने कहा कि आतंकवादी हमलों के लिए केवल राजनीतिक दल या नेता जिम्मेदार नहीं है। सुरक्षा अधिकारी भी दोषी हैं। इसके अलावा आम जनता की भी जिम्मेदारी बनती है कि वो सतर्कता बरते।
बड़े देश में छोटी घटनाएं होती रहती हैं
राकांपा के ही नेता और महाराष्ट्र के गृहमंत्री आरआर पाटिल ने रविवार को कहा था कि मुंबई जैसे बड़े शहरों में इस तरह की घटनाएं होती रहती हैं। उनके इस गैर जिम्मेदाराना बयान से काफी हल्ला मचा और अंतत: सोमवार को उन्हें अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा। पाटिल महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री भी है।
..वर्ना लोकतंत्र खतरे में पड़ जाएगा
जदयू नेता और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीशकुमार का कहना है नेताओं के खिलाफ ऐसे प्रदर्शन और उन्हें कोसना अनुचित है। इससे लोकतंत्र पर असर पड़ता है। नीतीशकुमार के मुताबिक हम जनता के प्रतिनिधि हैं, हमे भी उनके दर्द का अहसास है लेकिन विरोध का ये तरीका अनुचित है।
शहीद के पिता ने भगाया मुख्यमंत्री को
केरल के मुख्यमंत्री वीएस अच्युतानंद बेंगलूर पहुंचे शहीद उन्नीकृष्णन के परिजनों को ढांढ़स बंधाने लेकिन उन्नीकृष्णन के पिता ने उन्हें घर से निकल जाने को कहा। वे नाराज थे शहीद पर सियासत से। उन्नी के पिता ने कहा कि अगर ये तत्काल घर से नहीं निकले तो वे आत्महत्या कर लेंगे।
..और इन्हें अपमानित होना पड़ा
कांग्रेस नेता संजय निरूपम रविवार रात को लोगों के हाल जानने भारी सुरक्षा के मुंबई की सड़कों पर गए तो लोगों ने उन्हें घेर लिया। लोग आक्रोशित थे कि आप तो सुरक्षा घेरे में रहते हो और हमे मरने के लिए छोड़ रखा है। विरोध के चलते निरूपम को सिर झुकाकर लौटना पड़ा।
नेताओं की तरह हमें भी दो झेड सुरक्षा
मुंबई में प्रदर्शन कर रही इस महिला की मांग है कि हमें भी झेड श्रेणी की सुरक्षा चाहिए..नेताओं की तरह। इस महिला का कहना है कि नेताओं को तो ढेर सारी सुरक्षा मुहैया कराई जाती है लेकिन आम आदमी को क्यों नहीं? इस दौरान मौजूद कई अन्य प्रदर्शनकारियों ने भी राजनीतिक दलों पर जमकर गुस्सा उतारा।