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International International यरुशलम.
मुंबई में नरीमन हाउस के नाम से मशहूर छाबड़ हाउस पर आतंकी हमले को इजरायल ने अपने देश पर आतंकी कार्रवाई माना है। इस हमले में आठ इजरायली मारे गए थे। दो लापता लोगों की पहचान के लिए इजरायल से एक सात सदस्यीय विशेष टीम रविवार को मुंबई पहुंची है।
इस बीच, इजरायल ने उस आया को भी इजरायल में रहने की विशेष अनुमति दे दी है जिसने नरीमन हाउस में दो साल के बच्चे की जान बचाई थी। हमले में इस बच्चे के माता-पिता मारे गए थे, लेकिन यह आया बच्चे को लेकर भाग निकली थी।
इजरायल में हमले जैसा मुआवजा :
इस घोषणा के बाद नरीमन हाउस हमले के मृतकों व घायलों को इजरायल उसी तरह मुआवजा देगा जैसे इजरायल में आतंकी हमला होने पर उसके पीड़ितों को दिया जाता है। मुंबई पहुंची इजरायली टीम के प्रमुख चीफ सुपरिंटेंडेंट इत्झिक कोरोनियो ने बताया कि टीम लापता लोगों की पहचान के लिए फिंगर प्रिंट्स व दांतों के रिकॉर्ड तथा डीएनए नमूनों सहित सभी जरूरी सामग्री लाई है। इस टीम में उच्च स्तरीय आतंकरोधी विशेषज्ञ भी हैं।
इजरायल की विदेश मंत्री त्जिपीलिवनी ने बताया कि मंत्रिमंडल की मंजूरी के बाद आया सांद्रा सैमुअल को इजरायल लाने के प्रयास किए जा रहे हैं। इसने जिस बच्चे को बचाया, उसके माता-पिता छाबड़ हाउस में धार्मिक आंदोलन के लिए काम कर रहे थे। इससे पहले आंदोलन के प्रमुख रब्बी योसेफ यित्झाक अहारोनॉफ ने आया को भी बच्चे की देखभाल के लिए इजरायल भेजे जाने की प्रार्थना की थी। बच्च उसे छोड़ने को तैयार नहीं है।
छाबड़ हाउस :
छाबड़-लुबाविच विश्वासियों में से करीब 4000 दंपतियों ने विश्व के 73 देश में छाबड़ हाउस खोल रखे हैं। मुंबई के छाबड़ हाउस को चलाने वाले दंपती के आतंकी हमले में मारे जाने के बाद कई देशों से युवा छाबड़-लुबाविच विश्वासी यहां पहुंचे हैं। 2003 में मुंबई में नवविवाहित होल्त्सबर्ग दंपती ने पहला छाबड़ हाउस खोला था।