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मुंबई हमले के 5 दिन बाद.युद्ध जैसे हालात

नई दिल्ली. मुंबई हमलों के सबूत बार-बार पाकिस्तान की ओर इशारा करते लग रहे हैं। भारत ने अब पूरी ताकत से पाक पर बयानी हमले ही नहीं जमीनी कार्रवाई भी शुरू कर दी है। उधर, अमेरिका ने पाक पर निगाह टेढ़ी कर ली है। दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया है। अमेरिकी राजनयिक तो आशंका जता रहे हैं कि दोनों देश युद्ध की कगार पर हैं। इस बीच भारतीय सियासत में हमले की लगातार प्रतिक्रिया हो रही है। सोमवार को महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री आरआर पाटील ने भी इस्तीफा दे दिया है।

मुंबई हमलों के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव काफी बढ़ गया है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने सोमवार को पाकिस्तानी उच्चयुक्त को तलब किया और पाक जमीन पर आतंकवाद रोकने में विफलता के लिए विरोध दर्ज कराया। सूत्रों के मुताबिक, भारत ने पाकिस्तान से कुख्यात आतंकी अजहर मसूद और अंडरवल्र्ड डॉन दाउद इब्राहीम को सौंपने की मांग भी की है।

भारत ने पाकिस्तान को यह चेतावनी दी है कि यदि उसकी मांग नहीं मानी गई तो इसका असर आपसी संबंधों पर भी पड़ सकता है। पाक उच्चयुक्त को मुंबई हमले में पाक संगठनों की भूमिका के सबूत भी दिखाए गए। भारत सरकार का कहना है कि दाउद ने इन हमलों के लिए आतंकियों की मदद की है।

दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ने के बाद अमेरिका को यह चिंता है कि कहीं बिगड़ते हालात युद्ध की कगार तक न पहुंच जाएं। सूत्रों के अनुसार, भारतीय विदेश मंत्रालय में संयुक्त सचिव टीसीए राघवन (पाकिस्तानी मामले) ने पाकिस्तान के उच्चयुक्त शाहिद मलिक को औपचारिक रूप से विरोध पत्र (डिमार्शे) सौंपा। हालांकि पाक उच्चयोग के वरिष्ठ अधिकारी ने बाद में इसे सामान्य मुलाकात करार दिया है। भारतीय विदेश मंत्रालय के बयान में कहा गया कि हमले को पाक में बैठे आतंकी तत्वों ने अंजाम दिया है।

ऐसे में भारत सरकार यह अपेक्षा करती है कि पाकिस्तान में इन तत्वों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। विदेश राज्य मंत्री आनंद शर्मा से जब पत्रकारों ने इस संबंध में पूछा तो उनका कहना था कि पाकिस्तान को अब अपनी कथनी और करनी में अंतर दूर करना होगा।

गौरतलब है कि मुंबई हमलों की अब तक की जांच में सामने आया है कि हमलावर आतंकी कराची से जहाज पर सवार होकर आए थे। इस्लामाबाद इन हमलों में अपना हाथ होने से लगातार इनकार करता रहा है, लेकिन भारत का कहना है कि उसके पास इस संबंध में पर्याप्त सबूत मौजूद हैं।

आ सकती है जंग की नौबत :

दूसरी ओर, अमेरिकी राजनयिकों को आशंका है कि हमलों को रोक पाने में विफलता से हताश मनमोहन सरकार पाकिस्तानी क्षेत्र में बने आतंकी शिविरों पर हमला बोल सकती है। भारत और पाकिस्तान के परमाणु शक्ति संपन्न देश होने के कारण भी अमेरिका की चिंता में इजाफा हो गया है।

जरदारी की मुश्किलें बढ़ीं :

अमेरिका को भी भारत के इस दावे पर यकीन हो चला है कि मुंबई पर हमले की योजना पाकिस्तान में ही बनी और उसे अंजाम देने वाले भी पाकिस्तान से ही आए थे। ऐसे में उसने मध्यस्थता का रास्ता अपनाते हुए पाक राष्ट्रपति जरदारी पर इस बात का दबाव बढ़ा दिया है कि वह न सिर्फ अफगानिस्तान से लगी सीमा पर, बल्कि पाक अधिकृत क्षेत्र में सक्रिय आतंकियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करें।





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