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भोपाल. माइग्रेशन और डुप्लीकेट अंकसूची के लिए अब माध्यमिक शिक्षा मंडल कार्यालय के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। आवेदन जमा करने के चंद घंटे बाद ही डुप्लीकेट दस्तावेज हाथ में होंगे। यह संभव होगा मंडल का रिकार्ड कंप्यूटरीकृत होने से। मंडल पिछले साल से रिकार्ड का संधारण करवा रहा है। अब तक वर्ष 1993 तक का रिकार्ड कंप्यूटरीकृत हो गया है।
माध्यमिक शिक्षा मंडल का गठन वर्ष 1956 में हुआ है, तब से अब तक का रिकार्ड फाइलों और बस्तों में कैद है। प्रतिवर्ष 10 से 12 लाख विद्यार्थी मंडल द्वारा आयोजित परीक्षा में शामिल होते हैं। इसलिए हर साल दस्तावेजों में वृद्धि हो रही है। ऐसे में दो या दस साल पुराने दस्तावेज निकलवाने में आवेदकों को महीनों गुजर जाते हैं।
दस्तावेज तलाशने में दिक्कत के चलते मंडल का स्टाफ भी नखरे करता है। इससे सर्वाधिक परेशानी आवेदक को ही होती रही है। आवेदक की परेशानी को दूर करने के लिए मंडल ने रिकार्ड कंप्यूटरीकृत कराने का रास्ता अपनाया है।
यह भी कारण
पुराने रिकार्ड को कंप्यूटरीकृत करने का मुख्य कारण दस्तावेजों की सुरक्षा है। वर्ष-1956 से अब तक का रिकार्ड बस्तों में बंद है, जिसमें दीमक लगना शुरू हो गई है। दीमक से नष्ट होते रिकार्ड की चिंता ने मंडल को ऐसा करने को मजबूर किया है।
कहां पड़ती है जरूरत
किसी भी आवेदक को नौकरी लगते समय या जन्म का प्रमाण देने के लिए डुप्लीकेट अंकसूची की आवश्यकता पड़ती है, जबकि वह दसवीं की परीक्षा में 15 साल पहले बैठा होता है। ऐसे कम लोग ही होते हैं, जिनके पास इतने लंबे समय तक अंकसूची सुरक्षित रहती है। आवश्यकता पड़ने पर लोग थक हारकर मंडल कार्यालय में डुप्लीकेट अंकसूची के लिए आवेदन करते हैं। इसके अलावा अन्य संस्थान में एडमीशन लेने पर माइग्रेशन की आवश्यकता पड़ती है।
क्या है प्रक्रिया
डुप्लीकेट अंकसूची या माइग्रेशन के लिए आवेदक को निर्धारित चालन पत्रक के माध्यम से 70 रुपए जमा करने होते हैं। चालान की एक कॉपी के साथ मंडल कार्यालय में आवेदन करना पड़ता है।
नई व्यवस्था में भी इसी तरह काम होगा।
मंडल का दावा
मंडल के अधिकारियों का दावा है कि आवेदक को उसी दिन डुप्लीकेट दस्तावेज उपलब्ध करा दिए जाते हैं, जिस दिन वह आवेदन करता है। अधिकारियों के हस्ताक्षर के लिए रोके जाने वाले दस्तावेजों को एक या दो दिन में आवेदक के घर के पते पर पोस्ट कर दिया जाता है, जबकि हकीकत कुछ और है। एक दस्तावेज के लिए आवेदक को मंडल कार्यालय के कई चक्कर काटने पड़ते हैं।
वर्ष 1993 तक रिकार्ड कंप्यूटरीकृत कर लिया गया है। प्रतिदिन 35 हजार दस्तावेजों की स्केनिंग की जा रही है। अगले डेढ़ माह में कंप्यूटरीकरण का कार्य पूरा हो जाएगा, फिर डुप्लीकेट रिकार्ड जारी क रने में देरी नहीं होगी।
-कवीन्द्र कियावत, सचिव माध्यमिक शिक्षा मंडल