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इनका अंदाजे बयां कहता है कुछ और

भोपाल. राजधानी की गैस त्रासदी पर दुनिया का जनमत भले ही कुछ भी सोचता हो, लेकिन यूनियन कार्बाइड का मानना है कि यह हादसा नहीं था, बल्कि ऐसा जानबूझकर किया गया। उसके अधिकारी तो पीड़ितों की हरसंभव मदद करना चाहते थे, लेकिन इस काम में भी रोड़े अटकाए गए।

गैस पीड़ितों के जख्मों पर नमक छिड़कने की तर्ज पर ऐसे कईदावे यूनियन कार्बाइड की वेबसाइट पर किए गए हैं। इसमें लिखा गया है कि हादसे वाली रात प्लांट में पानी जानबूझकर मिलाया गया। इसकी पुष्टि के लिए विशेषज्ञों का हवाला दिया गया है। साइट यह बताने से भी नहीं चूकती कि हादसे से दो साल पहले ही प्लांट से आखिरी अमेरिकी अधिकारी जा चुका था और वहां का सारा काम हिंदुस्तानी ही संभाल रहे थे।

साइट पर मौजूद है 15 पेज का आलेख
साइट पर यूनियन कार्बाइड कापरेरेशन के रिटायर्ड वाइस प्रेसीडेंट (स्वास्थ्य, सुरक्षा तथा पर्यावरणीय कार्यक्रम) जैक्सन बी ब्राउनिंग का 15 पेज का आलेख भी मौजूद है। इसमें यह बताने की कोशिश की गई है कि किस तरह एक निर्दोष संस्थान को इस हादसे के कारण परेशान किया गया। आप लिखते हैं कि त्रासदी के बाद तमाम प्रयास के बावजूद हम इस संबंध में जानकारी नहीं पा सके।

यहां तक कि हिंदुस्तान में हमें ऐसा कोई व्यक्ति या संस्था नहीं मिल पा रही थी, जिसके जरिए हम दो मिलियन डॉलर की तत्काल सहायता दे सकें। यूका के तत्कालीन प्रेसीडेंट वारेन एंडरसन की मासूमियत बताते हुए ब्राउनिंग लिखते हैं कि भोपाल पहुंचने पर अधिकारियों ने उन्हें नजरबंद कर दिया। ऐसे स्वागत के बावजूद 10 दिसंबर की पत्रकार वार्ता में श्री एंडरसन ने जोर देकर कहा कि उनके साथ सौजन्यतापूर्ण व्यवहार किया गया।

ब्राउनिंग का यह भी कहना है कि भारत के औद्योगिकीकरण के लिए हमारे तमाम योगदान के बावजूद तत्कालीन राजनीतिक दलीलों के जरिए हमें बहुराष्ट्रीय खलनायक बना दिया गया। इसके लिए भारतीय जनता तथा वहां के संसाधनों का उपयोग किया गया। इस सबसे चलते हमें यह स्पष्ट हो गया कि यह सब कुछ यूनियन कार्बाइड के आर्थिक स्रोत हासिल करने की गरज से किया जा रहा था। वे यह भी लिखते हैं कि कई भारतीय अधिकारियों के लिए उस समय यही सुविधाजनक हो गया था कि वे भारत में बीती लगभग आधी शताब्दी के दौरान की हमारी व्यवसाय के जरिए स्थापित विश्वसनीयता तथा योगदान को नजरंदाज कर दें।





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