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भोपाल. दक्षता संवर्धन के बाद राज्य शिक्षा केंद्र एक्टीविटी बेस लर्निग (एबीएल) अवधारणा पर काम कर रहा है। तमिलनाडु और छत्तीसगढ़ से अनुभव इकट्ठा कर लौटे राज्य शिक्षा केंद्र के अधिकारी जनवरी से प्रदेश के सरकारी स्कूलों में कार्ड आधारित पढ़ाई कराने की तैयारी कर चुके हैं। इसके लिए कार्ड और सिलेबस तैयार किया जा रहा है। पहले चरण में प्रयोग के तौर पर प्रदेश के दो हजार स्कूलों में कार्ड आधारित पढ़ाई कराई जाएगी।
पहली और दूसरी कक्षा के बच्चों के लिए यह योजना है। योजना के तहत बच्चों को पढ़ाने के लिए कार्ड के रूप में उपकरण तैयार किया है और कार्ड को इंगित करने के लिए लोगो का सहारा लिया गया है। प्रत्येक विषय के लिए अलग-अलग कार्ड रहेगा और प्रत्येक कार्ड पर अलग लोगो। प्रत्येक लोगो किसी एक गतिविधि का वाहक है। इन कोर्डो के माध्यम से बच्चों को सुनना, बोलना, पढ़ना और फिर बोलना क्रमबद्ध सिखाया जाएगा।
लोगो के हिसाब से प्रत्येक कक्षा में छह ग्रुप रहेंगे। पहला और छठवां ग्रुप पूरी तरह से शिक्षक समर्थित रहेगा, जबकि दूसरे और पांचवें ग्रुप को शिक्षक आंशिक रूप से समर्थन देगा। बैठक-व्यवस्था कार्ड के मुताबिक : स्कूलों में बच्चे कार्ड के हिसाब से बैठेंगे। दरअसल, हर कार्ड पर एक लोगो होगा और यह लोगो, कक्ष में एक निर्धारित स्थान पर भी होगा। बच्चे अपने कार्ड के लोगो से कक्ष में बने लोगो का मिलान करेंगे और उसी स्थान पर बैठेंगे। इसके अलावा योजना की विशेषता रहेगी कि बच्चे की पढ़ाई जहां पर भी रुकेगी, उसे अगली बार वहीं से शुरू करना होगा।
माइलस्टोन पर मूल्यांकन
एक दक्षता पूरी करने पर एक माइलस्टोन (मील का पत्थर) पूरा होगा। इसके बाद छात्र का मूल्यांकन किया जाएगा। इसमें कमजोर रहने पर बच्चे को उपचारात्मक शिक्षण का कार्ड दिया जाएगा। जिस पर हाथी का लोगो होगा। पांच-छह माइलस्टोन के बाद समग्र मूल्यांकन किया जाएगा। कार्ड के साथ बच्चों को अभ्यास पुस्तिका भी दी जाएगी।
भोपाल के स्कूलों का चयन
इस योजना के लिए भोपाल के आठ स्कूलों का चयन किया गया है, जिसमें संजय गांधी मिडिल स्कूल और दीपशिखा स्कूल शामिल है। इन स्कूलों में योजना की शुरुआत राज्य शिक्षा केंद्र की टीम कराएगी। यह टीम पंद्रह दिन बच्चों को पढ़ाकर शिक्षकों की जिज्ञासा शांत करेगी।