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अपेक्षाएं पीड़ा और क्रोध का कारण बनती हैं

विकास मंत्र. आप क्रोध को दरकिनार न करके यदि इसकी गहराई में उतरें तो आप इसके तार किससे जुड़े पाएंगे? कोई क्रोधित क्यों होता है? क्योंकि किसी ने उसे कुछ अप्रिय कह दिया और वह आहत हो गया, परंतु जब कोई खुशामदी बात कह देता है तब आप और हम प्रसन्न हो जाते हैं। हम आहत क्यों होते हैं? आत्म-महत्ता के कारण- स्वयं को ऊंचे धरातल पर रखने के कारण।

दरअसल, आपके मन में एक धारणा बनी हुई है, आपने अपना एक प्रतीक गढ़ लिया है, अपनी एक छवि बना रखी है कि आपको क्या होना चाहिए, आप क्या हैं या आपको क्या नहीं होना चाहिए। आप स्वयं के बारे में एक छवि बना लेते हैं, क्योंकि आपने कभी यह मनन नहीं किया कि आप सचमुच क्या हैं। हम सोच लेते हैं कि हमें ऐसा बनना चाहिए, वैसा बनना चाहिए, हमें एक आदर्श, एक नायक, एक उदाहरण बनना चाहिए। जो बात हममें क्रोध को जगाती है वह है स्वयं के बारे में गढ़ लिए गए किसी आदर्श या धारणा पर की गई चोट। परंतु स्वयं के बारे में निर्मित धारणा तो जो हम हैं, इस तथ्य से पलायन करना हुआ।

जब आप जो हैं, इस वास्तविक तथ्य का अवलोकन कर पाते हैं तब आपको कोई आहत नहीं कर सकता। तब यदि कोई झूठा है और उसे बोल दिया जाए कि वह झूठा है, तो आहत होने का प्रश्न नहीं है, क्योंकि यह तो एक तथ्य है पर यदि आप झूठा न होने का स्वांग करते हैं और आपको झूठा कह दिया जाता है तब आप क्रोधित हो जाते हैं, भड़क उठते हैं। ‘जो है’ उसे देख सकने के लिए उसका अवलोकन करने के लिए सचमुच उससे परिचित हों, उसे जानें। इसके लिए जरूरी है कि न कोई सम्मति हो, न कोई मूल्यांकन, न कोई धारणा और न कोई भय हो।





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