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बस दुआ करना..देश के लिए

इंदौर. मुंह से निकलते लब्बैक अल्लाहुम्मा लब्बैक..के स्वर। आंखों से आंसुओं के रूप में छलकती अल्लाह के दरबार में जाने की खुशी.और ढेर सारी दुआएं देते अल्लाह के मेहमान..। इन मेहमानों को विदा करने आया हर शख्स यही कह रहा था बस दुआ करना..देश के लिए।

सोमवार को सदर बाजार स्थित हज हाउस में आस्था का ऐसा ज्वार उठा कि हर कोई उसमें डूबता चला गया। अवसर था हज यात्रियों के अंतिम जत्थे की विदाई का और जिसके साक्षी बने प्रशासनिक तंत्र के आला अफसर और विभिन्न धर्मो के प्रतिनिधि। दोपहर दो बजे हज हाउस में विदाई समारोह का आयोजन किया गया। जिसमें कमिश्नर बीपी सिंह, आईजी अनिल कुमार, कलेक्टर राकेश श्रीवास्तव, एसपी संजीव शमी के साथ ही अन्य समाज के प्रतिनिधि मौजूद थे।

सर्वधर्म समभाव का संदेश देते इस कार्यक्रम की शुरुआत अतिथियों के स्वागत से हुई। कलेक्टर व कमिश्नर ने भी यात्रियों का पुष्पमाला पहनाकर इस्तकबाल किया। शहर काजी डॉ. इशरत अली ने प्रशासन और यात्रा में सहयोग देने वाले सभी लोगों को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा प्रदेश में इंदौर के साथ ही भोपाल से भी हज यात्रा की शुरुआत होनी चाहिए। जिससे यात्रियों को और भी सुविधाएं मिल सके। संचालन आदिल कुरैशी ने किया। अंत में हाजी गफ्फार नूरी ने यात्रियों के लिए दुआ की।

इस अवसर पर डॉ. एसएम शेख, खुरासन पठान, अब्दुल वदूद जागीरदार, हाजी शरीफ खान, अनवर मुल्तानी, इलियास ठेकेदार, मोहम्मद इलियास, हफीजुर्रहमान, मोइनुद्दीन रिजवी आदि मौजूद थे। लगभग आधा घंटा चले इस कार्यक्रम के बाद जब यात्रियों की विदाई का क्षण आया तो माहौल भावुक हो गया। विदा करने आए परिजन और यात्रियों की आंखों से आंसू छलक पड़े। सभी यात्री अपने परिजन को गले लगाकर और सिर पर हाथ रखकर दुआ दी।

सभी ने की सराहना
>> कलेक्टर राकेश श्रीवास्तव ने कहा यह हमारे लिए बहुत पुण्य का काम है। पहली बार इंदौर को हज यात्रा की मेजबानी का मौका मिला और आज यात्रियों का अंतिम काफिला रवाना हो रहा है। उन्होंने कहा बीच में कुछ दिक्कतें जरूर आई लेकिन अगली बार यात्रियों को और भी सुविधा के साथ रवाना किया जाएगा।
>> कमिश्नर बीपी सिंह ने कहा मुझे खुशी है कि हज यात्रियों के इस्तकबाल का मौका मिला। शुरुआत हो चुकी है और अब हर आने वाले साल पहले से बेहतर इंतजाम किए जाएंगे। उन्होंने शहर काजी डॉ. इशरत अली का जिक्र करते हुए कहा काजी साहब हज पर नहीं गए लेकिन आप लोगों को हज पर पहुंचाने की व्यवस्था उन्होंने ही की है।
>> एसपी संजीव शमी बोले यात्रा के दौरान पूरा प्रशासनिक अमला मदद के लिए मौजूद रहा। पहली बार में कहीं कुछ कठिनाई हुई होगी लेकिन अगली बार और भी अच्छे से व्यवस्था की जाएगी।
>> सिक्ख समाज के सभा अध्यक्ष प्रीतमसिंह छाबड़ा ने कहा हाजियों की खिदमत से कुछ पुण्य हमें भी मिल गया। यह अंतिम पड़ाव नहीं है अब यह यात्रा इंदौर से सतत जारी रहेगी।

यात्री बोले
>> बेटमा के मोहम्मद शफी खान और इंदौर के हामीद हुसैन व माजीद अहमद ने कहा बहुत अच्छा लग रहा है। इससे बड़ा मौका तो जीवन में कुछ और हो ही नहीं सकता।
>> डबलचौकी की सुगराबी व गुलखां शेख ने बताया हज हाउस के इंतजामों की जितनी तारीफ की जाए कम है। सभी ने पूरा सहयोग दिया।
>> देवास के ईस्माइल शेख ने कहा पहली बार जा रहा हूं। देश में अमन-चैन के लिए दुआ करुंगा।

12 दिन 29 फ्लाइट और 3282 यात्री
इंदौर को पहली बार हज यात्रा की मेजबानी का मौका मिला। 12 दिन में 29 उड़ान से कुल 3 हजार 282 यात्री रवाना हुए। इनके इंतजामों पर करीबन 1 करोड़ का खर्च हुआ। यात्रा की शुरुआत 16 नवंबर से हुई और पहला चरण 24 नवंबर को खत्म हुआ।

इस दौरान 22 फ्लाइट से 2 हजार 562 यात्री मुंबई होते हुए जेद्दा पहुंचे। दुसरा चरण 29 नवंबर से 1 दिसंबर तक चला। जिसमें अतिरिक्त 7 फ्लाइट से स्पेशल कोटे के 720 यात्री रवाना हुए।इन यात्रियों के लिए 40 लाख की लागत से हज हाउस तैयार किया गया।

वहीं सदर बाजार स्थित हज हाउस पर यात्रियों के ठहरने व भोजन का इंतजाम किया गया। इसमें लगभग 50 लाख का खर्च आया। यात्रा के अंतिम दिन सोमवार को दोपहर 2.50 व शाम 6.50 की दो फ्लाइट से 240 यात्री रवाना हुए।





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