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इंदौर. शहर को आगामी रेल बजट में एक अहम सुविधा मिलने का रास्ता साफ हो गया है। जनवरी अंत से इंदौर-भिंड इंटरसिटी एक्सप्रेस का मेंटेनेंस इंदौर के बजाय ग्वालियर में होने लगेगा। इससे इंदौर में एक और अतिरिक्त ट्रेन के मेंटेनेंस की गुंजाइश बढ़ेगी। इसका उपयोग इंदौर-पुणो ट्रेन के उस अतिरिक्त रैक के मेंटेनेंस में हो सकता है जिसका उपयोग ट्रेन को रोज चलाने में होगा।
अभी सप्ताह में तीन गिन चल रही पुणो ट्रेन चलाने में दो रैक का इस्तेमाल हो रहा है। यदि ट्रेन को नियमित करना हो तो सबसे पहले अतिरिक्त रैक की व्यवस्था करना होगी। जानकारों का कहना है अगले रेल बजट में पूरी संभावना है कि रेलवे बोर्ड पुणो ट्रेन को प्रतिदिन चलाने का निर्णय ले ले। रतलाम रेल मंडल भी ट्रेन को रोज चलाने का प्रस्ताव पश्चिम रेलवे मुख्यालय को भेज चुका है। वहां से इसे रेलवे बोर्ड की तरफ भेजने की तैयारी है। पुणो ट्रेन का मेंटेनेंस इंदौर में ही होता है और अब तक जगह नहीं होने से इसे रोज चलाने का मामला अटका पड़ा था।
बैठक में होगा निर्णय
इस बारे में पश्चिम रेलवे यात्री परामर्शदात्री समिति के वरिष्ठ सदस्य नागेश नामजोशी का कहना है यात्रियों के बढ़ते दबाव के मद्देनजर पुणो ट्रेन को नियमित करना बहुत जरूरी है। भिंड ट्रेन का मेंटेनेंस ग्वालियर शिफ्ट होने के बाद इंदौर में एक मेंटेनेंस स्लॉट खाली होगा। इसका उपयोग उस अतिरिक्त रैक के लिए हो सकता है जिसका उपयोग पुणो ट्रेन को रोज चलाने में करना हो। जनवरी में रेलवे टाइम टेबल कमेटी की बैठक में पुणो ट्रेन को रोज चलाने का निर्णय हो सकता है। यह प्रस्ताव लंबे समय से लंबित है।
सफल रहा तीसरा फेरा
इंदौर-पुणो ट्रेन की लोकप्रियता का आलम यह है कि जब यह दो के बजाय तीन दिन चलने लगी तो लोगों ने इसे हाथोहाथ लिया था। दरअसल, इंदौर-मुंबई अवंतिका एक्सप्रेस में लगभग सालभर वेटिंग चलने से कई यात्री मुंबई जाने के लिए पुणो ट्रेन पसंद करते हैं। इसके अलावा पुणो आने-जाने वाला यात्रियों का एक बड़ा वर्ग भी है जो रोज ट्रेन न होने से बसों पर निर्भर है। रेलवे वाणिज्यिक विभाग के आधिकारिक सूत्र भी स्वीकारते हैं पुणो ट्रेन में अभी 15 कोच लगते हैं लेकिन इसके बावजूद अकसर वेटिंग बनी रहती है। यदि इसे नियमित किया जाता है तो यात्रियों की सुविधा और राजस्व के लिहाज से भी यह रेलवे के लिए फायदेमंद होगा।