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इंदौर. चुनाव के दौरान की गई सख्ती के खिलाफ विधानसभा क्षेत्र इंदौर-2 के मंत्री गुट के भाजपाइयों ने सोमवार को एसपी संजीव शमी के खिलाफ मोर्चा खोलने की कोशिश की लेकिन पुलिस का रुख देख अपना रवैया नरम कर लिया। हालांकि इसके बाद भी बिना अनुमति रैली निकालने पर मालवा मिल चौराहे पर न सिर्फ गिरफ्तारियां हुईं बल्कि रैली में से पत्थर आने पर पुलिस ने डंडे भी चलाए तो भाजपाई इधर-उधर भागते नजर आए।
रविवार को की गई घोषणा के अनुसार सुबह से ही नंदीग्राम मैदान पर भाजपाई जमा होने लगे। प्रदर्शन की अगुआई वार्ड क्रमांक 34 के पार्षद चंदू शिंदे कर रहे थे। उनके साथ पार्षद राजेंद्र राठौर, सूरज कैरो, भाजयुमो अध्यक्ष अजीत रघुवंशी, भाजपा नगर उपाध्यक्ष हरिनारायण यादव भ थे। 11 बजे तक कार्यकर्ताओं को लाने का सिलसिला चलता रहा।
इसके बाद कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए श्री यादव ने कहा चुनाव के दौरान एसपी ने जिस तरह से हिटलरशाही दिखाई है, उसका विरोध करने के लिए रैली निकालकर राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा जाएगा। रैली मालवा मिल चौराहे से कमिश्नर कार्यालय तक जाएगी। इससे पहले मालवा मिल चौराहे पर ही प्रशासन का अधिकारी ज्ञापन ले लेता है तो कार्यक्रम वहीं समाप्त हो जाएग। रैली में नारे बिल्कुल नहीं लगाए जाएंगे। विरोध प्रकट करने के लिए तख्तियां हाथ में लिए रहेंगे। माताएं-बहनें सबसे आगे रहेंगी और उनके पीछे चार-चार की कतार में बाक कार्यकर्ता रहेंगे।
इसके बाद भाजपाई आगे बढ़े। उधर, मालवा मिल चौराहे पर आला अफसरों के नेतृत्व में भारी पुलिस बल, एसटीएफ और एसएएफ के जवानों में मोर्चा संभाल रखा था। रैली जैसे ही चौराहे पर पहुंची, एडिशनल एसपी राजेश हिंगणकर, सीएसपी रायसिंह नरवरिया, संजयसिंह और सिमाला प्रसाद ने अन्य पुलिस अधिकारियों और जवानों के साथ आगे बढ़कर रोक लिया। भाजपा नेता लगातार मांग कर रहे थे कि वे एडीएम को ज्ञापन देना चाहते हैं इसलिए एडीएम को बुलाया जाए मगर पुलिस अधिकारियों ने यह कहकर उनकी मांग नहीं मानी कि उनकी रैली अवैध है, अत: गिरफ्तारी की जाएगी।
पत्थर आते ही चल गए पुलिस के डंडे- सभी प्रमुख नेताओं और महिलाओं सहित करीब सौ कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार कर लिया गया तभी अचानक पीछे से दो-तीन पत्थर आए और पुलिस टूट पड़ी। लाठीचार्ज होते ही कार्यकर्ताओं में भगदड़ मच गई। जिसे जिधर रास्ता मिला उधर ही भागा। कई दुकानों में घुस गए तो पुलिसकर्मियों ने निकालकर खदेड़-खदेड़कर पीटा।
एक कार्यकर्ता गिर पड़ा- भाग-दौड़ में पुलिसकर्मी यह भी नहीं देख रहे थे कि किसे कहां पड़ रही है। एक कार्यकर्ता के सिर पर डंडा पड़ा तो वह वहीं गिर पड़ा। उसके साथी उसे उठाकर गली में ले गए। वह बोल भी नहीं पा रहा था। तभी पुलिसकर्मियों ने उसके साथियों को धमकाया कि तुरंत इसे यहां से लेकर जाओ वरना सब पिटेंगे।
पार्षद रेडवाल की हुई दुर्गति- लाठीचार्ज होते ही पार्षद मांगीलाल रेडवाल एक दुकान में घुस गए तो पुलिसकर्मियों ने उन्हें निकाला और बुरी तरह से धकियाते हुए पुलिस बस तक ले गए। इस चक्कर में उनके कुर्ते की जेब फट गई और चश्मा दो टुकड़े होकर सड़क पर गिर पड़ा। पुलिसकर्मी ने चश्मे का एक शीशा उठाया मगर दूसरा फूटा देखा तो फेंक दिया।
एसपी सस्ती लोकप्रियता हासिल कर रहे हैं- गिरफ्तारी के बाद श्री शिंदे ने कहा शहर में अपराध बढ़ रहे हैं। एसपी ने न तो चेन लुटेरों को पकड़ा, न ही अवैध शराब के अड्डों को खत्म किया। गुंडे शान से बाहर घूम रहे हैं, शरीफ लोग अत्याचार का शिकार हो रहे हैं। उन्होंने सस्ती लोकप्रियता हासिल करने के अलावा कुछ नहीं किया है। मैं पूछना चाहता हूं कि कितने गुंडों पर रासुका लगाई, कितनों को जिलाबदर किया, कितने शराब के अड्डे पकड़वाए?
180 भाजपाई जेल गए : धारा 144 का उल्लंघन करने के मामले में पुलिस ने कुल 265 भाजपाइयों को गिरफ्तार किया था जिसमें प्रमुख रूप से पार्षद चंदू शिंदे, राजेंद्र राठौर, सूरज कैरो, कल्याण देवांग, मांगीलाल रेडवाल, दुर्गा कौल के साथ भाजपा नगर उपाध्यक्ष हरिनायारण यादव,भाजयुमो के अजीत रघुवंशी हैं। इसमें 180 पुरुष तथा ८५ महिला कार्यकर्ता थीं। पुलिस ने सभी को धारा १८८, ३५३ के तहत कोर्ट में पेश किया। प्रदर्शनकारियों के वकील ने सभी की जमानत के लिए अपील की थी, मगर कोर्ट ने केवल महिलाओं को जमानत पर रिहा किया, शेष सभी को जेल भेज दिया।