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Chhattisgarh
Raipur Raipur रायपुर. मौदहापारा की झुग्गी बस्ती में रविवार को देर रात लगी आग से पांच झोपड़ियां जलकर राख हो गई। आग की भयंकर लपटों में एक महीने की बच्ची घिर गई और दम घुटने से उसकी मौत हो गई। फायर ब्रिगेड और मोहल्ले वालों की मुस्तैदी डेढ़-दो घंटे में आग पर काबू पा लिया गया, वरना कई झोपड़ियां चपेट में आ सकती थीं।
मोहल्लेवालों ने बताया कि सबसे पहले बस्ती में शरीफ कुरैशी के मकान से धुआं निकलता देखा गया। उस वक्त पूरा परिवार गहरी नींद में था। जब तक उनकी नींद टूटी, उनका पूरा घर आग भीषण लपटों से घिर चुका था। बदहवास हालत में सदस्य जान बचाने के लिए घर के बाहर भागे। घर में धुएं के भर जाने से एक महीने की बच्ची का दम घुट गया। उसे गंभीर हालत में अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन डाक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। बच्ची शरीफ की बेटी थी।
इधर, आगजनी से बस्ती में कोहराम मच गया। फायर ब्रिगेड का अमला मौके पर पहुंचा इससे पहले ही एक के बाद एक लाइन से सात झोपड़ियों में आग फैल चुकी थी। शोर शराबा मचते ही लोग घरों से निकल गए। दमकल कर्मियों के अलावा मोहल्ले के लोग भी आग बुझाने में जुट गए। बाल्टियों से पानी लाकर आग बुझाने की कोशिश की गई। बड़ी मुश्किल से डेढ़ दो घंटे बाद आग पर काबू पाया जा सका। फायर ब्रिगेड की दो-तीन गाड़ियों को कई चक्कर लगाने पड़े।
आगजनी में शरीफ के अलावा फिरोज खान, अनवर अली, नसीमखान और मल्लूद्दीन के घर खाक हो गए। उनके घरों का कोई सामान साबूत नहीं बचा। टीवी, फर्नीचर, बिस्तर और कपड़े समेत खाने पीने का सारा सामान आग की भेंट चढ़ गया। आगजनी ने सात परिवारों को पूरी तरह बेघर कर दिया। पुलिस के मुताबिक मोहल्ले में बिजली के ज्यादातर कनेक्शन कच्चे हैं। आशंका है कि खुले वायर में शार्ट सर्किट की वजह आग लगी होगी और घरों में फैल गई। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
पीड़ितों को मदद
बेघर बार लोगों की मदद के लिए लोग सामने आने लगे हैं। कुछ स्वयंसेवी संस्थाओं के कार्यकर्ताओं ने पीड़ित परिवारों को कंबल और खाने पीने की सामग्री का वितरण किया। मोहल्ले के लोगों ने पीड़ित लोगों को मुआवजा दिलाने की मांग की है।
मां की गोद में बेजान हुई नन्हीं जान
एक महीने की नन्हीं जान ने अपनी मां की गोद में ही दम तोड़ा। झोपड़ी में आग लगने के बाद अफरा-तफरी के हालात थे। चांद बी का परिवार छोटे-छोटे बच्चों को बाहर निकालने में भिड़ा था। चांद बी नन्हीं जान को अपनी गोद में लिपटाकर बाहर भागी। वह यह सोचकर संतुष्ट थी कि उसने अपनी बच्ची की जान बचा ली है। करीब एक घंटे तक वह बच्ची को सीने से लगाए हुए अपना घरबार आग में स्वाहा होते देखती रही। उसे गुमान भी नहीं था कि उसके झोपड़ी छोड़ने से पहले ही नन्हीं बिटिया दम घुटने से चल बसी है।