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गैस पीड़ितों की स्थिति में सुधार नहीं : जब्बार

भोपाल. तीन दिसंबर को गैस कांड को 24 वर्ष पूरे हो जाएंगे, लेकिन गैस पीड़ितों के हालात में आज तक कोई सुधार नहीं आया है। बीते 24 वर्र्षो में न तो उन्हें न्यायोचित मुआवजा मिला है और न ही समुचित चिकित्सा व आर्थिक, सामाजिक पुनर्वास। मुआवजे के नाम पर गैस पीड़ितों के साथ सरकार धोखा कर रही है। यह बात भोपाल गैस पीड़ित महिला उद्योग संगठन के संयोजक अब्दुल जब्बार ने पत्रकार वार्ता में कही।

उन्होंने कहा कि इन 24 वषरे में लगभग एक लाख गैस पीड़ित स्थाई रूप से अपंग हुए हैं। तीन लाख लोग आज भी विभिन्न प्रकार की जटिल बीमारियों से ग्रस्त हैं। वहीं गैस राहत के छह अस्पताल तथा नौ से अधिक औषधालय व आठ मिनी यूनिट 40 करोड़ रुपए वार्षिक बजट के बावजूद नाकाफी साबित हो रहे हैं।

वहीं दूसरी ओर दोनों संस्थाओं में 600 से अधिक चिकित्सा विशेषज्ञों तथा अन्य पेरामेडिकल स्टाफ का भारी अभाव बना हुआ है। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि 24 वर्ष बाद भी गैस पीड़ितों की पहचान उनके रोग अनुसार नहीं की जा सकी है। उन्होंने बताया कि गैस पीड़ितों को मुआवजे के नाम पर अंतरिम राहत के रूप में 1980 से 1996 तक 14400 रुपए प्राप्त हुए है, इसके बाद मुआवजा वितरण में 10600 रुपए प्राप्त हुए थे, इसी प्रकार शेष राशि पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद 25000 रुपए और 2004 से 2006 के मध्य वितरित की गई है।

1990 से 2006 तक यानी 16 वर्र्षो में 50 हजार रुपए उन्हें प्राप्त हुए जो 1984 के मात्र 10 हजार रुपए के बराबर है। यह राशि भरण पोषण तो दूर यदि केवल 10 रुपए प्रतिदिन भी औषधि पर व्यय करने के लिए भी पर्याप्त नहीं है।

गैस कांड...

फिर याद आया मंजर
गैस कांड की 24वीं बरसी से पहले एक बार फिर लोगों की आंख के आगे दो-तीन दिसंबर 1984 की दरमियानी रात का वह खौफनाक मंजर घूम गया। विभिन्न गैस पीड़ित संगठन इस मौके पर अनेक आयोजन कर रहे हैं। भोपाल गैस पीड़ित महिला स्टेशनरी कर्मचारी संघ, महिला पुरुष संघर्ष मोर्चा और ग्रुप फार इंफरमेशन एंड एक्शन ने संयुक्त पत्रकार वार्ता में बताया कि वे दो तथा तीन दिसंबर को विभिन्न कार्यक्रम के जरिए गैस पीड़ितों की दशा उजागर करेंगे।

इसके तहत मशाल जुलूस, श्रद्घांजलि और पुतला दहन जैसे कार्यक्रम रखे गए हैं। इस मौके पर यह भी बताया गया कि संगठन गैस पीड़ितों की मांगों को प्रभावी ढंग से उठाने के लिए बच्चों की मदद भी लेंगे।





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