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'आतंकियों को रोका, फिर छोड़ा'

नई दिल्ली. नौसेना प्रमुख एडमिरल सुरीश मेहता ने स्वीकार किया कि तटरक्षक बल ने आतंकियों की नौका पकड़ी थी, लेकिन सभी कागजात पूरे होने पर बाद में उन्हें छोड़ दिया गया था। समुद्री रास्ते से मुंबई पर हुए आतंकी हमले को लेकर एक-दूसरे पर दोषारोपण के बीच नौसेना प्रमुख ने मंगलवार को पत्रकारों से कहा कि कहीं न कहीं ‘व्यवस्था फेल’ हो गई थी। साथ ही यह भी कहा कि हमले से पहले उन्हें समय रहते ‘कार्रवाई लायक’ कोई ठोस खुफिया जानकारी नहीं मिली।

एडमिरल मेहता ने मंगलवार को यहां पत्रकारों से कहा कि हम समुद्री रास्ते से आए आतंकियों को रोक नहीं सके, यह अत्यंत गंभीर मामला है। यह व्यवस्था की विफलता थी और इसे उसी रूप में लिया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि हमारे यहां डेढ़ लाख से अधिक मछलीमार नौकाएं हैं और इनमें से 50 हजार से अधिक नौकाएं अकेले गुजरात और महाराष्ट्र की हैं। अगर इनमें से एक-तिहाई नौकाएं भी मुंबई की हैं तो वहां से रोज हजारों लोग नौकाएं लेकर समुद्र में जाते हैं। सभी की पहचान करना वाकई एक समस्या है और इस खामी को दूर करने की जरूरत है।

तटीय सुरक्षा और नौकाओं की जांच के बारे में प्रभावी प्रणाली बनानी होगी ताकि समय रहते पता लग सके कि कौन सी नौका वापस आ चुकी है और कौन सी नहीं। सेना प्रमुखों की कमेटी के मुखिया एडमिरल मेहता ने स्वीकार किया कि तटीय सुरक्षा और निगरानी तंत्र में खामियां हैं और इन्हें दूर किया जा रहा है।

खुफिया जानकारी और उसे देखते हुए एहतियाती उपाय नहीं करने संबंधी सवालों पर एडमिरल मेहता ने कहा कि देखना यह होता है कि किस सूचना पर कार्रवाई की जरूरत है और किस पर नहीं। नौसेना प्रमुख का यह बयान ऐसे समय आया है, जब रक्षा मंत्री ए के एंटनी से उनकी मुलाकात में उनकी ¨खचाई की खबरें आई है। एडमिरल मेहता का कहना था कि जब भी वह रक्षा मंत्री से मुलाकात करते हैं अगले दिन अखबारों में यह खबर आ जाती है कि नौसेना प्रमुख की ¨खचाई हुई।





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