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रोड़ी (सिरसा. इसे स्पष्ट तौर पर अधिकारियों की लापरवाही ही कहा जा सकता है कि 30 एकड़ जमीन, कोठी, ट्रैक्टर, कार व अन्य संसाधनों के बावजूद एक परिवार को बीपीएल परिवार माना गया है। यह परिवार है गांव खुईयां नेपालपुर में सुखविंद्र सिंह का। सुखविंद्र सिंह के भाई व बहन हांगकांग में रहते हैं। वर्ष 2008 में सरकार के निर्देशों पर पूरे प्रदेश भर में किए गए बीपीएल के पुन: सर्वे में अधिकारियों की आंखें बंद रही और उन्होंने इसी अवस्था में सुखविंद्र के परिवार को बीपीएल घोषित कर दिया। वहीं जब स्वयं सुखविंद्र सिंह से बात की गई तो उन्होंने माना कि उनके पास तमाम सुविधाएं हैं मगर वे नहीं जानते कि सरकार ने उनका नाम बीपीएल परिवार में कैसे दर्ज किया है।
और वे तरस रहे हैं
दूसरी ओर गांव छतरियां में महेंद्र ंिसंह का भी एक ऐसा परिवार है जो पूरी तरह कच्च और जर्जरावस्था में है। स्थिति यह है कि इसकी छत कभी भी गिर सकती है। शारीरिक रूप से विकलांग महेंद्र ने संसाधनों के अभाव में बीपीएल के लिए आवेदन किया था मगर अधिकारियों ने उसके अभावग्रस्त जीवन की अनदेखी करते हुए उसे सामान्य वर्ग का ही पात्र माना है।
गांव में सुखविंद्र सिंह के पास तमाम संसाधन होने संबंधी मामला बीडीपीओ कार्यालय के नोटिस में लाया गया है मगर अभी तक इस परिवार का नाम बीपीएल की सूची से नहीं काटा गया है। -सूरजभान गांधी, सरपंच, खुईयां नेपालपुर
यदि खुईयां नेपालपुर में ऐसा मामला है तो वे उसकी जांच कराएंगे। हालांकि उनके नोटिस में इस तरह का कोई मामला नहीं है, फिर भी आवश्यक कार्रवाई कर लाभपात्र को इसका लाभ दिया जाएगा।
-प्रेमदास धीमान, बीडीपीओ, बड़ागुढ़ा, सिरसा