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नई दिल्ली मुंबई आतंकी हमलों के बाद हो रही केंद्र की आलोचना के मद्देनजर नए गृहमंत्री पी. चिदंबरम सुरक्षा ढांचे को और बेहतर एवं चाक-चौबंद बनाने में जुट गए हैं। उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता सुरक्षा को उन्नत बनाना है। सुरक्षा के इस बेहतर ढांचे की रूपरेखा अगले कुछ दिनों में सामने आ जाएगी।
चिदंबरम ने मंगलवार को सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति की बैठक के अलावा राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार एमके नारायणन, खुफिया एजेंसियों के प्रमुखों, एनएसजी प्रमुख और गृहमंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठकें कर इस विषय पर लंबी चर्चा की।
एनएसजी कमांडो :
मंत्रालय के अनुसार, एनएसजी के ब्लैक कैट कमांडो को और अधिक आक्रामक बनाने पर ध्यान दिया जा रहा है। इसके तहत उन्हें बेहतर आक्रमण क्षमता व संरक्षण प्रदान करना और त्वरित कार्रवाई के लिए विमान मुहैया करना शामिल है।
सैद्धांतिक मंजूरी :
सूत्रों ने बताया कि योजना को सैद्धांतिक मंजूरी मिल चुकी है। एनएसजी की मांग थी कि उसे विमान और हेलीकाप्टर दिए जाएं और हरियाणा के मानेसर में स्थित उसके कैंपस के निकट एक हवाईपट्टी बनाई जाए। ये मांगे भी इस योजना में शामिल हैं। सूत्रों ने कहा कि योजना को तो जल्द मंजूरी मिल जाएगी, लेकिन विमान हासिल करने और संबंधित आधारभूत ढांचा तैयार करने में कुछ वक्त लगेगा।
एनएसजी के जोनल केंद्र
सूत्रों के अनुसार, मंत्रालय ने चारों मेट्रोपोलिटन सिटी को ध्यान में रखते हुए एनएसजी के जोनल केंद्र स्थापित करने की योजना को भी मंजूरी दे दी है। इस संबंध में चिदंबरम ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार नारायणन से दिन में दो बार मुलाकात की।
रासुका में संशोधन पर विचार
चिदंबरम ने केंद्रीय मंत्री व मशहूर वकील कपिल सिब्बल और विधि मंत्रालय के अन्य अधिकारियों से मुलाकात कर सुरक्षा को बेहतर बनाने से जुड़े कानूनी पहलुओं पर चर्चा की। इस दौरान विशेषतौर पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून-1980 (रासुका) को और कठोर बनाने के लिए इसमें संशोधन करने पर विचार-विमर्श हुआ। संशोधित कानून में आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा देने या मदद करने वाले आरोपी को फांसी की सजा देने और उसकी संपत्ति व खाते सील करने का प्रावधान प्रस्तावित है।