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मुंबई. अमेरिका की संघीय जांच एजेंसी (एफबीआई) मुंबई हमले में लश्करे तैयबा के आतंकियों द्वारा इस्तेमाल की गई इंटरनेट टेलीफोनी के कोड समझने में भारतीय जांचकर्ताओं की मदद भी कर रही है। दो दिनों से मुंबई में एफबीआई की टीम में स्काटलैंड यॉर्ड के जांचकर्ता भी हैं।
एजेंसी ने मारे गए छह अमेरिकी नागरिकों के सिलसिले में केस दर्ज कर लिया है। अमेरिकी कानूनों के तहत देश के बाहर किसी भी अमेरिकी नागरिक की मौत की जांच कर एफबीआई को चार्जशीट सौंपनी होती है। इस टीम के सामने सबसे बड़ी चुनौती आतंकी कार्रवाई के दौरान हमलावरों को सीमा पार से लश्कर कमांडरों से इंटरनेट टेलीफोनी के जरिए मिल रहे निर्देशों को डी-कोड करने की है। इस बाबत टीम ने गिरफ्तार आतंकी मोहम्मद अजमल आमिर ईमान उर्फ कसाब से की पूछताछ में हुए खुलासे की रिपोर्ट मांगी है।
एफबीआई सेटेलाइट फोन के जरिए आतंकियों की हुई बातचीत और इंटरनेट पर एयर फ्रीक्वेंसी वेव के इस्तेमाल की भी जांच कर रही है। बताया जाता है कि आतंकियों ने पाकिस्तान से कॉल्स रिसीव करने में वाइस ओवर इंटरनेट प्रोटोकॉल (वीओआईपी) का इस्तेमाल किया। जांचकर्ता कोड तोड़कर यह समझने की कोशिश में हैं कि ये कॉल्स कब आना शुरू हुईं और फोन की लोकेशन क्या थी।
कॉल रिकॉर्ड जुटाया
एफबीआई और स्कॉटलैंड यॉर्ड ने कॉल रिकॉर्ड जुटा लिया है और हमले के दौरान आतंकियों द्वारा इस्तेमाल फोन की वेव पोजिशन का पता लगा रहे हैं। विस्फोटक के नमूने और टाइमर भी टीम ने अपने कब्जे में ले लिए हैं। मुंबई से फोन पर बात करते हुए हेम ने कहा कि नरीमन हाउस से मृत मिले छह इजराइली नागरिकों की मौत गोलियों या ग्रेनेड हमले से हुई। वे यह नहीं कह सकते कि ये गोलियां और ग्रेनेड किसके थे। उनकी टीम का ऐसा मानना है कि कुछ बंधकों की मौत बुधवार को उसी दिन हो गई थी जिस दिन इस इमारत में हमलावर घुसे थे। कुछ लोग गुरुवार और शुक्रवार को कमांडो कार्रवाई के बीच मारे गए।
बयान गैर जिम्मेदाराना
इजराइल सरकार ने इस अफसर के बयान को गैर जिम्मेदाराना और दोनों देशों के रिश्तों को नुकसान पहुंचाने वाला बताया है। विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि ऐसे ही लोग समस्याएं पैदा कर रहे हैं।