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हर पखवाड़े मीटर रीडिंग जरूरी: सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने व्यवस्था दी है कि दूर संचार विभाग वैसे मामले में हर पखवाड़े प्रत्येक व्यक्तिगत टेलीफोन कनेक्शन की मीटर रीडिंग करने को बाध्य है जहां कि उपभोक्ता को अनिश्चित बिल मिलता है।

जस्टिस आरवी रवींद्रन और एलएस पंटा की बेंच ने एक उपभोक्ता पर 7.50 लाख रुपए से अधिक का बिल थोपने की कोशिशों को झटका देते हुए यह व्यवस्था दी। जीवर्गीज के मुताबिक, उसने दिसंबर 1994 से अगस्त 1995 के दौरान द्वैमासिक अवधियों से संबंधित चार बिलों में दर्शाए गए कॉल नहीं किए। उपभोक्ता ने शिकायत की थी कि विभाग की या तो रीडिंग त्रुटिपूर्ण थी अथवा किसी व्यक्ति ने उसके कनेक्शन का दुरुपयोग किया। फिर भी दूरसंचार विभाग ने उसकी दलील नहीं मानी।

समलैंगिक संबंधों को कानूनी रूप नहीं दे सकती न्यायपालिका
नई दिल्ली . केंद्र ने समलैंगिक संबंधों को विधि सम्मत करार देने की न्यायपालिका की शक्ति पर सवालिया निशान लगाया है। साथ ही उसने कहा है कि कोटरें को ऐसा करने से बचना चाहिए क्योंकि यह विधायी कार्यो का अतिक्रमण करने के बराबर है। अतिरिक्त सॉलीसिटर जनरल पीपी मल्होत्रा ने कहा कि कोर्ट को यह निर्णय करने का हक नहीं है कि क्या कानून होना चाहिए और क्या कानून नहीं हो। यह संसद का काम है तथा संसद की इच्छा का प्रतिनिधित्व उसके सदस्य करते हैं। ये सदस्य अपने लोगों की इच्छा और कठिनाइयों को जानते हैं।

मल्होत्रा ने दिल्ली हाईकोर्ट में पेश 100 पृष्ठों के लिखित जवाब में ये विचार जताए। केंद्र का यह जवाब समलैंगिक अधिकार कार्यकर्ताओं की जनहित याचिका पर आया है। इस याचिका में इन कार्यकर्ताओं ने निजी स्तर पर रजामंद वयस्कों में समलैंगिक संबंधों को वैध करने के बारे में कोर्ट से निर्देश चाहा है।

फिलहाल आईपीसी के सेक्शन 377 के तहत देश में समलैंगिक संबंध अपराध है और इसमें ऐसी गतिविधियों में लिप्त होने पर सजा का भी प्रावधान है। उधर, समलैंगिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि संविधान ने समता का अधिकार दिया है और यह लिंग आधारित भेदभाव को निषिद्ध करता है। फिर भी देश के 25 लाख समलैंगिकों के अधिकारों का उल्लंघन किया जा रहा है।





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