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ट्रैफिक वार्डन योजनाः जनता का सहारा

भोपाल. मुंबई, दिल्ली और कोलकाता की तर्ज पर राजधानी की यातायात व्यवस्था को सुदृढ़ करने भोपाल पुलिस ट्रैफिक वार्डन अवधारणा पर काम कर रही है। योजना को मूर्तरूप देते हुए पुलिस ने मंगलवार को ट्रैफिक वार्डन बनने के इच्छुक लोगों को विज्ञापन के माध्यम से खुला आमंत्रण दिया है। अब अगले 15 दिनों में शहर में तीस ट्रैफिक वार्डन विभिन्न चौराहों पर पुलिस की मदद करते देखे जा सकेंगे।

ट्रैफिक वार्डन योजना पब्लिक और पुलिस के रिश्ते मधुर बनाने की कवायद है। ट्रैफिक पुलिस बल की कमी के कारण योजना शुरू करना पुलिस की मजबूरी भी है। वर्तमान में जितना बल है उससे ट्रैफिक को संभालना मुश्किल हो गया है। यही वजह है कि शहरवासियों को जिम्मेदारी में भागीदार बनाया जा रहा है।

योजना का मकसद: ट्रैफिक वार्डन योजना का मूल मकसद जनता से जनता की गलतियां सुधरवाना है। ट्रैफिक वार्डन लोगों को न सिर्फ सड़क पर चलना सिखाएंगे, बल्कि यातायात से आमजन को होने वाली परेशानी और पुलिस की तकलीफ से भी जनता को अवगत कराएंगे, ताकि पुलिस पर लगने वाले आरोपों पर अंकुश लग सके। इस योजना का एक और मकसद है ट्रैफिक वार्डन के माध्यम से राजधानी में होने वाली हर संदिग्ध गतिविधि पर नजर रखना।

काम के प्रति प्रतिबद्ध रहेंगे: ट्रैफिक वार्डन सप्ताह में कम से कम दो दिन तीन-तीन घंटे पुलिस को देंगे। इन्हीं कार्यवाही के दौरान पुलिस के साथ रहना पड़ेगा। चूंकि पुलिस ट्रैफिक वार्डन को मानदेय नहीं देगी, इसलिए उनकी ड्यूटी के लिए घंटे निर्धारित नहीं हैं। वे स्वेच्छा से ड्यूटी करेंगे। पहले चरण में नियुक्त वार्डन को शहर के मुख्य चौराहों पर यातायात व्यवस्था में सहयोग करना होगा।

शिकायत मिलते ही विदाई
वार्डन बनना जितना आसान है, उससे भी आसान होगी वार्डन की विदाई। वार्डन की नियुक्ति के लिए एसपी की अध्यक्षता में बोर्ड का गठन किया गया है। यहां आवेदक का इंटरव्यू लिया जाएगा। उसकी यातायात व्यवस्था में रुचि का भी पता किया जाएगा। इसके बाद उसे वर्दी और परिचय-पत्र देकर नियुक्त कर दिया जाएगा। वाहन चालकों से वसूली और बदसलूकी की शिकायत मिलने पर उन्हें तत्काल हटा दिया जाएगा।

संस्थाओं के प्रपोजल आए
योजना का मसौदा तैयार करने से पहले लायंस क्लब सहित तीन अन्य संस्थाओं के सदस्य ट्रैफिक वार्डन बनने की इच्छा जाहिर कर चुके हैं। इनमें रिटायर अधिकारी, डॉक्टर और इंजीनियर शामिल हैं। इसलिए पुलिस के अफसरों को उम्मीद है कि वार्डन के रूप में पुलिस को शहर के अच्छे लोग मिलेंगे।

योजना पहले हो चुकी असफल
शहर की यातायात व्यवस्था में सुधार के लिए पुलिस को सहयोग करने के उद्देश्य से लगभग पौने दो दशक पहले भी ट्रैफिक वार्डन का प्रयोग शुरू किया गया था। इसमें तत्कालीन एसपी पन्नालाल ने कुछ उत्साही स्वयंसेवकों को ट्रैफिक वार्डन की जिम्मेदारी सौंपी थी। इनमें से कुछ ने तो अच्छा काम किया, लेकिन कुछ स्वयंसेवक अधिकार मिलने के कारण यातायात सुधार के बजाय ‘स्वयं की सेवा’ में जुट गए। संस्था के तत्कालीन उपाध्यक्ष और कोषाध्यक्ष पर अधिकारों का दुरुपयोग, चंदा उगाही, वाहन चालकों से वसूली जैसे गंभीर आरोप लगे थे। संस्था के ऑडिट में भी बड़े पैमाने पर गड़बड़ी पाई गई थी। लिहाजा शिकायतों का अंबार लगने पर अचानक यह व्यवस्था बंद कर दी गई थी।

शहर में ट्रैफिक पुलिस
सिपाही 135
हवलदार 65
एएसआई 13
एसआई 08
सूबेदार 01
टीआई 05
नोट : शहर में यातायात व्यवस्था सुगम बनाने के लिए चार गुना स्टाफ की आवश्यकता है।

स्वच्छ छवि वाले बनेंगे वार्डन
योजना के तहत ट्रैफिक वार्डन उन्हीं लोगों को बनाया जाएगा, जिनकी छवि स्वच्छ होगी। ऐसे लोगों को मानदेय के रूप में तो कुछ नहीं मिलेगा, लेकिन वे वर्दी पहनकर पुलिस बनने के अरमान पूरे कर सकेंगे। 21 वर्ष से कम और 65 वर्ष से अधिक उम्र वाला व्यक्ति ट्रैफिक वार्डन नहीं बन सकेगा।

यातायात व्यवस्था को सुगम और सुचारू बनाने के लिए ट्रैफिक वार्डन की नियुक्ति की जा रही है। इच्छुक व्यक्ति 10 से 15 दिसंबर तक यातायात थाने में आवेदन कर सकेगा। इसके बाद उसे बोर्ड के सामने इंटरव्यू के लिए आना होगा।
- सतविंदर सिंह लल्ली, डीएसपी यातायात





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