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भोपाल. शहर को बूंद-बूंद पानी के लिए तरसना नहीं पड़ता यदि झील संरक्षण प्राधिकरण (एलसीए) ने अपना काम मुस्तैदी से किया होता। भोज वेटलैंड योजना के तहत जापान बैंक फॉर इंटरनेशनल कॉपरेरेशन ने बड़े तालाब के संरक्षण के लिए जो शर्त्े तय की थीं एलसीए ने उनका पिछले चार सालों में पालन ही नहीं किया। नतीजतन तालाब के किस हिस्से पर कितना अतिक्रमण हो गया, पता ही नहीं चला। इस बार स्थिति यह बनी की तालाब में जरूरत के मुताबिक पानी नहीं पहुंच सका।
एलसीए बड़े तालाब के प्रति कितना उदासीन है इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि इस बार सूखे तालाब की लगभग दो हजार एकड़ भूमि पर किसानों ने फसलें उगा लीं और रासायनिक खाद का उपयोग शुरू कर दिया। इसके बाद भी एलसीए ने अब तक किसी तरह की कार्रवाई नहीं की है। भोज वेटलैंड योजना के समाप्त होने पर एलसीए को बड़े तालाब के संरक्षण का कार्य सौंपा गया था।
मॉनिटरिंग की जिम्मेदारी पर्यावरण नियोजन एवं समन्वय संगठन (एप्को) को दी गई थी। एलसीए को यहां सेटेलाइट मैपिंग से तालाब की स्थिति पर नजर रखनी थी कि कहीं उसके कैचमेंट एरिया में अतिक्रमण तो नहीं हो रहा है? यह भी देखना था कि हानिकारक रसायन पानी में घुलकर उसे दूषित तो नहीं कर रहे हैं। इसके बावजूद एलसीए ने इस तरह की कोई भी गतिविधि संचालित नहीं की।
इसका खुलासा प्रयत्न नाम की एक स्वयंसेवी संस्था द्वारा एप्को से सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई जानकारी से हुआ है। इस संस्था को एप्को ने लिखकर दिया है कि एलएसीए ने उन्हें अब तक एक भी रिपोर्ट नहीं सौंपी है।
इसलिए नहीं हुई कार्रवाई
खास बात यह है कि एलसीए की मॉनिटरिंग की जिम्मेदारी एप्को को तो दे दी गई, पर एलसीए के सीईओ और एप्को के कार्यपालक निदेशक के पद पर हमेशा एक ही अधिकारी को बैठाया गया। इसलिए ठीक प्रकार से एलसीए की मॉनिटरिंग नहीं हो सकी। वर्तमान में उक्त दोनों पदों पर दीप्ति गौड़ मुखर्जी पदस्थ हैं।
नालों से दूषित हो रहा है झील का पानी
भोजवेट लैंड योजना के तहत तालाब में गिरने वाले नालों के पानी को रोका जाना था। इसके लिए स्ट्रक्चर भी बनाए गए थे, पर वह अब ठीक से काम नहीं कर रहे हैं। इससे तालाब में करबला और बैरागढ़ के पास आधा दर्जन नालों का गंदा पानी मिल रहा है।
क्या थी भोज वेटलैंड योजना
बड़े व छोटे तालाब को प्रदूषण से मुक्त करने के लिए जापान बैंक फॉर इंटरनेशनल कॉपरेरेशन ने केंद्र सरकार की गारंटी पर प्रदेश सरकार को 245 करोड़ दिए थे। यह योजना वर्ष 1995 से 2004 तक चली। योजना पूरी होने के बाद जापान द्वारा दी गई राशि में से 24 करोड़ शेष बचे।
उक्त राशि के ब्याज से प्रदेश की झीलों के संरक्षण के लिए झील संरक्षण प्राधिकरण का गठन किया गया। भोपाल सिटीजन फोरम ने उठाया मामला: भोज वेटलैंड योजना के तहत एलसीए द्वारा बरती गई कोताही के खिलाफ भोपाल सिटीजन फोरम ने आवाज उठाई है। इस संस्था ने सभी जानकारियों के साथ जापान सरकार के आर्थिक मामलों के विभाग के सचिव तथा भारत सरकार के वित्त मंत्रालय को एक ज्ञापन भेजा है।
मुझे भोपाल सिटीजन फोरम का ज्ञापन मिला है। उसमें उठाए गए बिंदुओं पर जांच कराई जा रही है। रही बात तालाब की जमीन पर से फसलों को हटाने की उसके बारे में जिला प्रशासन के साथ बैठक हुई थी। यदि इस पर कार्रवाई नहीं हुई है तो इस मामले में जल्द कार्रवाई कराने का प्रयास किया जाएगा।
- दीप्ति गौड़ मुखर्जी, सीईओ, एलसीए व एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर, एप्को