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तीन महीने में आए 32 हजार फोन कॉल्स

भोपाल. भिंड के किसान छविराम गेहूं की उन किस्मों के बारे में जानना चाहते हैं, जो देर से बोएं और अच्छा उत्पादन दें। सिंगरौली के श्रीलाल साकेत मिर्च की फसल में कीड़े लगने से परेशान हैं और उज्जैन के देवीसिंह को आलू की उपज में आ रहे काले धब्बों ने चिंता में डाला हुआ है। ठेठ गांवों के अपने खेतों में खड़े ये किसान ऐसी मुश्किलों को मोबाइल फोन के जरिए आसान कर रहे हैं। देश में अपनी तरह के अनूठे किसान कॉल सेंटर में पिछले तीन महीनों में 32 हजार फोन कॉल्स ऐसी ही अनगिनत समस्याओं को लेकर आए हैं।

सितंबर के पहले सप्ताह में भोपाल में आरंभ हुए इस कॉल सेंटर ने किसानों को उनकी समस्याओं के लाइव समाधान के दरवाजे खोल दिए हैं। इस अत्याधुनिक सेंटर में उनका फोन रिसीव करने के लिए कोई सरकारी अफसर नहीं बल्कि इंटरनेट से सुसज्जित 30 कृषि वैज्ञानिक मौजूद हैं। इनमें 23 साल के युवा कृषि विशेषज्ञ रवि चौहान से लेकर कृषि विभाग से 37 साल तक सेवाएं देने के बाद एडीशनल डायरेक्टर पद से रिटायर हुए डीएस कुशवाह जैसे सीनियर भी हर दिन किसानों से रूबरू हैं।

इन्हें प्रदेश के कोने-कोने से हर दिन औसतन 450 फोन आ रहे हैं। पिछले हफ्ते मावठे की सौगात जिन इलाकों को मिली तो तीन दिनों तक फोन कॉल्स की संख्या बढ़कर आठ-नौ सौ तक पहुंच गई। गांवों में बिजली और पानी के संकट भले ही स्थाई हों, लेकिन संचार क्रांति ने किसानों को भी काफी राहत दी है।

गौर कीजिए कि 90 फीसदी किसानों ने मोबाइल फोन से कॉल सेंटर के टोल फ्री नंबर 18002334433 को डायल किया। इनमें भी ज्यादातर ने सीधे अपने खेत से अपनी फसल की समस्याएं दर्ज करई। केंद्र की राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत प्रदेश सरकार ने इस सेंटर की कल्पना को साकार किया और इसके संचालन की जिम्मेदारी इंडियन सोसायटी ऑफ एग्रीबिजनेस प्रोफेशनल्स आईसेप को दी। आईसेप हर दिन 12 घंटे सेंटर में मौजूद विशेषज्ञों के अलावा दूसरी पंक्ति के विशेषज्ञों की भी खास तैयारी कर रहा है, जो किसानों की जटिल समस्याओं के हल बताएंगे।

सबसे ज्यादा कॉल्स: शिवपुरी, दतिया, छतरपुर, सागर और ग्वालियर जिले के किसान फोन करने में सबसे आगे हैं। जबकि आलिराजपुर, डिंडोरी, सीधी, श्योपुरकलां और सिवनी वे पांच जिले हैं, जहां से कम कॉल्स आ रहे हैं। ये सभी किसान परंपरागत फसलों, उनके कीटनाशकों, बागवानी, पशुपालन, मिट्टी की गुणवत्ता, जैविक कृषि, सरकारी योजनाएं, नए कीटों, नई फसलों, नई दवाओं और कृषि विस्तार की अपनी योजनाओं से जुड़े प्रश्न कर रहे हैं। इससे पहले केंद्र सरकार ने ही 1551 पर ऐसी ही सुविधा उपलब्ध कराई थी। इस पर सिर्फ बीएसएनएल के फोन से ही संपर्क संभव था। लेकिन आईसेप के नंबर पर किसी भी फोन से संपर्क संभव हुआ।

खेती की दुनिया में अनूठा प्रयोग
खेती की दुनिया बदल रही है। नए बीज, नए कीट और नए कीटनाशक आ रहे हैं। किसानों को इनकी अपडेट जानकारी जरूरी है। हमें खुशी है जागरूक किसान इस सुविधा का फायदा खेतों में ले रहे हैं।
-डॉ. जीएस जरयाल, क्षेत्रीय निदेशक, आईसेप

यहां का अनुभव दिलचस्प है। किसान खात से ही अपनी समस्या बताते हैं और जब समस्या से निजात पाते हैं तो फीड बैक देते हैं। किसानों की परंपरागत दुनिया में यह अनूठा प्रयोग है।
-डीएस कुशवाह, पूर्व अतिरिक्त संचालक, कृषि





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