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अधिकार के लिए लेनी होगी अनुमति

भोपाल. राज्य शासन ने सभी शासकीय सेवकों पर बिना के अनुमति शासकीय दस्तावेजों या जानकारी को बाहर देने पर रोक लगा दी है और इसे सिविल सेवा आचरण नियम के खिलाफ करार दिया है। इसके लिए नियमों में संशोधन किया गया है। राज्य शासन की अनुमति के बिना कोई भी सरकारी कर्मचारी ‘सूचना का अधिकार’ पर अमल नहीं करेगा।

राज्य सरकार के यह प्रावधान सामान्य प्रशासन विभाग ने संविधान के अनुच्छेद 309 के तहत मिली शक्तियों का उपयोग करते हुए मप्र सिविल सेवा आचरण नियम 1965 में नए संशोधन के जरिए किया है। नियम 12 में नया प्रावधान किया गया है, जिसमें ‘शासकीय जानकारी की संसूचना’ शीर्षक के तहत कहा गया है कि हर शासकीय सेवक अपने कत्र्तव्यों का सद्भावनापूर्वक अनुपालन करने में, सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 और उसके अधीन बनाए गए नियमों के उपबंधों के अनुसार किसी व्यक्ति को जानकारी संसूचित (बताएगा) करेगा, लेकिन कोई भी शासकीय सेवक, शासन के किसी सामान्य या विशेष आदेश के अनुसार या उसे सौंपे गए कत्र्तव्यों का अनुपालन करने में कोई शासकीय दस्तावेज या उसका कोई भाग या वर्गीकृत जानकारी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष तरीके से संसूचित नहीं करेगा।

यदि किसी अन्य शासकीय सेवक या किसी अन्य व्यक्ति को ऐसी जानकारी बताने के लिए अधिकृत किया गया है तो उसे वह जानकारी देना होगी। सामान्य संशोधन को सभी विभागों को पहुंचा दिया गया है। सिविल सेवा आचरण नियमों में इस संशोधन से केंद्र सरकार के सूचना का अधिकार कानून के पालन में एक और बाधा डाल दी गई है। पहले इस कानून का पालन करना हर शासकीय सेवक के लिए जरूरी था, अब इस कानून का पालन बिना राज्य सरकार की अनुमति के नहीं किया जाएगा।

याचिका खारिज
विभागीय पदोन्नति परीक्षा में शामिल सरकारी कर्मचारी की उत्तर पुस्तिका की प्रति सूचना के अधिकार के तहत किसी दूसरे व्यक्ति को उपलब्ध कराने के मामले में राज्य सूचना आयोग की खंडपीठ निर्णय लेगी। मंगलवार को सूचना आयुक्त ने उत्तर पुस्तिकाओं की प्रति उपलब्ध नहीं कराने के प्रथम अपीलीय अधिकारी द्वारा दिए गए निर्णय को यथावत रखते हुए प्रकरण का निपटारा कर दिया, साथ ही इस नीतिगत मुद्दे को आयोग की खंडपीठ में विचारार्थ रखने का निर्णय लिया। खंडपीठ के समक्ष इस तरह के दूसरे अन्य प्रकरण विचाराधीन हैं।

मामला पटवारी से राजस्व निरीक्षक के लिए हुई विभागीय पदोन्नति परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं का है। उज्जैन जिले के एक पटवारी आदर्श कुमार जामगड़े ने आयुक्त भू-अभिलेख कार्यालय ग्वालियर के लोक सूचना अधिकारी को आवेदन देकर अप्रैल 2007 में हुई विभागीय पदोन्नति परीक्षा में शामिल कुछ पटवारियों की उत्तर पुस्तिकाओं की छाया प्रति मांगी थी। लोक सूचना अधिकारी ने नियमों का हवाला देकर यह जानकारी देने से इनकार कर दिया। प्रथम अपीलीय अधिकारी ने भी लोक सूचना अधिकारी के निर्णय को यथावत रखते हुए अपील खारिज कर दी। इसके बाद राज्य सूचना आयोग में अपील की गई थी।





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