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भोपाल. चुनावी माह में बिजली संकट से निपटने के लिए राज्य सरकार ने पुख्ता प्रबंध किए थे। इस साल एक अप्रैल से एक दिसंबर के बीच आठ महीने में दो अरब 38 करोड़ रुपए की अतिरिक्त बिजली ली गई। अकेले नवंबर में अतिरिक्त बिजली खरीदने पर एक अरब रुपए खर्च किए गए। यानी पर्याप्त बिजली मुहैया कराने हर रोज औसतन तीन से चार करोड़ रुपए खर्च हुए। चुनाव बीतते ही अतिरिक्त खरीदी पुराने दिनों पर लौट आई है, एक दिसंबर को एक करोड़ 36 लाख रुपए ही इस पर खर्च किए गए।
सरकार ने चुनाव के मद्देनजर पश्चिम बंगाल और पंजाब आदि राज्यों से अतिरिक्त बिजली खरीदी में नवंबर माह में सर्वाधिक करीब 100 करोड़ रुपए खर्च किए, जबकि आठ माह में कुल 238.43 करोड़ रुपए की अतिरिक्त बिजली खरीदी।
जाहिर है चुनाव के महीने में सरकार किसी भी किस्म की दिक्कत मोल नहीं लेना चाहती थी। चुनाव आयोग ने भी आदेश दिया था कि मतदान के दिन पूरे प्रदेश में बिजली की सतत सप्लाई सुनिश्चित की जाए। मतदान के बाद अतिरिक्त बिजली खरीदी में एकदम कमी कर दी गई है। बिजली बोर्ड के सूत्रों ने बताया कि नवंबर में हर दिन औसतन तीन से चार करोड़ रुपए की बिजली खरीदी हुई लेकिन अब इसमें कमी कर दी गई है।