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Madhya Pradesh
Gwalior Gwalior ग्वालियर. नियंत्रक खाद्य एवं औषधि प्रशासन तथा खाद्य (स्वास्थ्य) प्राधिकारी ने ग्वालियर में बनने वाले 11 देसी घी के ब्राण्ड की बिक्री प्रतिबंधित कर दी है। साथ में यह आदेश भी दिया है कि सभी घी निर्माताओं को जारी लाइसेंस निरस्त कर न्यायालयीन कार्रवाई की जाए। उक्त सभी मिथ्या छाप व जांच में अमानक पाए गए हैं।
जिला प्रशासन से मिली जानकारी के अनुसार, मंगलवार को दोपहर में जारी आदेश में नियंत्रक ने कहा है कि जिले में 50 दिन की अवधि में कुल 29 नमूने देसी घी व मावे के जांच के लिए भोपाल स्थित प्रयोगशाला में भेजे गए थे। इनमें से अधिकतर अमानक पाए गए हैं। इसलिए अमानक पाए गए देसी घी का थोक व खेरिज विक्रय लोकहित में रोका जाना आवश्यक हो गया है ताकि अपमिश्रित खाद्य सामग्री का जनता उपयोग न कर सके।
नियंत्रक ने कलेक्टर ग्वालियर आकाश त्रिपाठी द्वारा 19 नवंबर को भेजे गए पत्र का भी आदेश में हवाला देकर कहा है कि मिलावटी घी या अन्य सामग्री का विक्रय स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है। इस आदेश के बाद यदि कोई व्यक्ति प्रतिबंधित ब्राण्ड के घी का विक्रय करता है तो वह दण्डनीय अपराध की श्रेणी में आएगा।
इन ब्राण्ड पर लगा प्रतिबंध
>> मंगलम प्योर घी, कार्तिक प्योर घी
>> ग्वाला श्री एगमार्क घी, अनमोल प्योर घी, सारथी प्योर घी, पनघट प्योर घी, एगमार्क मिल्काना शुद्ध घी, ब्रजराज घी, केशर प्योर देसी घी, केसरी दानेदार शुद्ध घी, डेरी मिल्क प्रीमियम शुद्ध घी।
आदेश के बाद माल सीज
नियंत्रक खाद्य एवं औषधि प्रशासन से मिले आदेश के बाद कलेक्टर ने मिलावट रोकने के लिए बने प्रकोष्ठ के सदस्यों की बैठक बुलाई। इसमें सहायक कलेक्टर स्वाति मीणा, नायब तहसीलदार अनिल राघव व औषधि प्रशासन के दोनों निरीक्षक उपस्थित हुए।
कलेक्टर से मिले निर्देश के बाद यह दल सारथी, पनघट व मिल्काना घी के गोदामों पर पहुंचा। यहां लगभग पांच लाख रुपए कीमत का तैयार देसी घी रखा था। इस घी की बिक्री रोकने के लिए उसे निर्माता के पास ही भवन के कमरे में सीज कर दिया गया। प्रतिबंधित किए गए कुछ अन्य ब्राण्ड के निर्माताओं के ठिकानों पर भी यह दल पहुंचा पर अधिकतर निर्माता मिले नहीं। प्रकोष्ठ के अनुसार प्रतिबंधित ब्राण्ड के घी की बिक्री रोकने के लिए कार्रवाई जारी रहेगी।
जो ब्राण्ड प्रतिबंधित किए गए हैं, उनकी बिक्री अब नहीं हो सकेगी।
-आकाश त्रिपाठी, कलेक्टर