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भोपाल. मंसूर अली नहीं जानते थे कि जिस जहरीली गैस के असर में वे चार साल की उम्र में आए थे उसका खतरनाक पहलू उनकी बेटी को भी भुगतना पड़ेगा। उस 12 महीने की ताहीबा को डॉक्टरों ने अपाहिज करार दे दिया जो यह जानती भी नहीं कि आज से 24 साल पहले शहर किस हादसे से गुजरा था। इस मासूम को अपने जन्म के पहले हुई त्रासदी का दंश झेलना पड़ रहा है।
सलेहा, अटल अय्यूब नगर
सलेहा सुल्तान के जीवन पर गैस कांड का असर हमेशा हावी रहेगा क्योंकि परिवार के 15 में से सात सदस्यों की मृत्यु गैस के असर से होने वाले कैंसर के कारण हुई है। सलेहा के सिर से माता-पिता का साया गैस कांड के बाद उनके बीमार रहने के कारण उठा और उसने अपने तीन बच्चे भी इन्हीं बीमारियों के कारण खो दिए।
जगदीश, जेपी नगर
गैस कांड की सजा भुगत रहा 20 साल का जगदीश उस वक्त पैदा भी नहीं हुआ था, लेकिन माता-पिता से रोग उसे विरासत में मिला। अब जिंदगी भर मधुमेह और हाथ पैरों में सूजन की परेशानी झेलना मजबूरी है। 20 साल की उम्र में जगदीश कदकाठी से केवल 10 से 12 साल का बच्च लगता है। जगदीश की 70 साल की बूढ़ी दादी ने गुस्से मंे चिल्ला कर कहा- कई बार लोगो यहां आते हैं और देख जाते हैं कोई दवा नहीं देता। हमारी जिंदगी को मजाक मत बनाइए।
दीपिका थानी, बैरागढ़
त्रासदी के दिन तीन दिसंबर को जन्मी दीपिका २४ साल की हो चुकी ह्रै, लेकिन गैस के दुष्प्रभाव के कारण उसका शारीरिक विकास नहीं हो पाया। उसका अब तक समुचित इलाज नहीं हो पाया है। उनके पिता कन्हैयालाल थानी अपनी लाड़ली बेटी का इलाज कराकर थक गए। वे भोपाल से दिल्ली और मुंबई तक के डॉक्टरों से संपर्क कर चुके हैं लेकिन दीपिका अब तक स्वस्थ नहीं हो पाई। श्री थानी को अब भी उम्मीद है कि उनकी बेटी स्वस्थ हो जाएगी।