|
इंदौर. सेमेस्टर सिस्टम के आगे अब छात्रों ने भी घुटने टेक दिए हैं। 75 फीसदी हाजिरी पूरी करने के लिए अतिरिक्त कक्षाएं भी लगाई गईं लेकिन कम उपस्थिति वाले छात्रों ने इसमें भी रुचि नहीं दिखाई। शासकीय कला व वाणिज्य महाविद्यालय में कॉमर्स व आर्ट्स के पांच सौ से ज्यादा छात्रों को सेमेस्टर से प्राइवेट में शिफ्ट किया जाएगा। इधर, उच्चशिक्षा विभाग ने प्राचार्यो को आंतरिक आदेश देकर हर हाल में हाजिरी पूरी कराने के आदेश दिए हैं।
उच्च शिक्षा विभाग की सेमेस्टर को लेकर सख्ती अब ढीली पड़ती जा रही है। अतिरिक्त संचालक उच्चशिक्षा डॉ. एसके शर्मा ने बताया 17 दिसंबर से सेमेस्टर परीक्षा की शुरुआत है लेकिन कॉलेजों को 12 दिसंबर तक कक्षाएं लगाकर हाजिरी पूरी कराने के आदेश हैं। इस बार कॉमर्स प्रथम वर्ष में नौ से ज्यादा एडमिशन हुए थे लेकिन प्रथम चरण में सात सौ छात्रों को ही परीक्षा आवेदन फॉर्म दिए गए। आर्ट्स की हालत इससे भी खराब है। तकरीबन 475 एडमिशन हुए थे, लेकिन ढाई सौ छात्र ही सेमेस्टर के लिए पात्र पाए गए।
आंतरिक आदेश तो यह है
आंतरिक आदेश तो यह है कि जो छात्र एक दिन भी कॉलेज आया है, उसकी कैसे भी करके 75 फीसदी उपस्थिति कराई जाए। अन्यथा प्राचार्यो को सी ग्रेड दी जाएगी। इसके लिए कॉलेजों में चार अलग-अलग लिस्ट बनाई गई है। पहली में शून्य उपस्थिति वाले छात्र, दूसरी में 1 से 30 फीसदी, तीसरी में 30 से 50 और चौथी लिस्ट में 50 फीसदी से ज्यादा उपस्थिति वाले छात्रों को रखा गया है। चौथी लिस्ट वाले छात्रों को सेमेस्टर हेतु पात्र माना गया है। 30 से 50 फीसदी उपस्थिति वाले छात्रों को खींचतान कर 75 फीसदी तक ले जाया गया। 1 से 30 प्रतिशत वालों को लिफ्ट करवाकर 75 फीसदी तक लाना है। अब समस्या शून्य और एक से 30 उपस्थिति वालों की है लेकिन छात्र सेमेस्टर के झमेले, रोज कॉलेज आने के झमेले से बचने के लिए प्राइवेट परीक्षा देने पर ज्यादा जोर दे रहे हैं।
सिर के ऊपर से जा रहा सेमेस्टर
बीए प्रथम वर्ष की छात्रा शुचिता शर्मा कहती हैं सेमेस्टर की पढ़ाई तो सिर के ऊपर से जा रही है। लगातार पांच घंटे क्लास में बैठना, नया सिलेबस, प्रोजेक्ट, प्रैक्टिकल इन सबके लिए पर्याप्त समय नहीं है। इससे तो प्राइवेट परीक्षाएं ठीक हैं। बीकॉम प्रथम वर्ष के विद्यार्थी विपुल चौहान पढ़ाई के साथ काम भी करते हैं। डिग्री हासिल करना है, इसलिए नियमित एडमिशन लिया था। रोजाना पांच घंटे क्लास में बैठना, प्रोजेक्ट बनाना संभव नहीं है। इससे अच्छा प्राइवेट परीक्षा देकर डिग्री हासिल कर लूंगा।
दो-तीन साल लगेंगे
शासकीय निर्भयसिंह पटेल (न्यू साइंस कॉलेज) के प्राचार्य एसएल गर्ग ने कहा सेमेस्टर को लेकर अभी काफी समस्या आ रही है। इसे व्यवस्थित होने में दो-तीन वर्ष लगेंगे। अभी हर दिन कुछ न कुछ संशोधन हो रहा है।