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लाठीचार्ज के बाद भाजपा में गुटबाजी तेज

इंदौर. सोमवार को निषेधाज्ञा के बावजूद विधानसभा क्षेत्र इंदौर-2 के भाजपा कार्यकर्ताओं द्वारा निकाली गई रैली ने संगठन को ही सांसत में डाल दिया है। यूं तो लाठीचार्ज के बाद कार्यकर्ताओं को जेल भेजे जाने के मुद्दे पर संगठन उनके साथ खड़ा होने का दावा कर रहा है लेकिन हकीकत में इनके खिलाफ अलग ही खिचड़ी पक रही है।

शहर के कुछ नेताओं ने प्रदेश के वरिष्ठ नेताओं को नंदानगर क्षेत्र में पूर्व में आयोजित किए गए कार्यक्रमों की सिलसिलेवार जानकारी उदाहरणों के साथ दी है। इसके साथ ही इन नेताओं ने दलील दी है कि संगठन को भरोसे में न लेकर या असहमति जताने के बाद भी किए जाने वाले आंदोलन से पार्टी की लगातार किरकिरी हो रही है।

इस कड़ी आपत्ति के बाद प्रदेश संगठन से शहर इकाई को मतगणना के बाद कुछ कड़े कदम उठाए जाने का आश्वासन मिला है। वहीं दूसरी ओर इंदौर-2 के दो बड़े नेताओं ने भी पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारियों को अफसरों के रवैये से अवगत करवाया है। बुधवार को इंदौर लौट रहे कैलाश विजयवर्गीय और रमेश मेंदोला इस मामले में कार्यकर्ताओं के साथ बैठक कर अगली रणनीति पर विचार करेंगे।

दबी जुबान से स्वीकार की गलती, अब मामला वरिष्ठों के पाले में
रमेश मेंदोला ठ्ठ पार्टी को सूचना दी थी, प्रशासन प्रजातंत्र को ही भूल गया- इंदौर-2 से भाजपा उम्मीदवार रमेश मेंदोला ने प्रशासन की कार्रवाई की कड़ी निंदा करते हुए कहा आचार संहिता के नाम पर प्रशासन प्रजातंत्र को ही भूल गया। राह चलते लोगों को जिस तरह परेशान किया उससे आपातकाल जैसे हालात पैदा कर दिए गए थे। जब पार्टी पदाधिकारियों के साथ कार्यकर्ताओं ने शांतिपूर्वक विरोध किया तो उन पर लाठियां बरसाई गईं।

अफसरों को जनता के मौलिक अधिकारों के हनन की यह मनमानी भारी पड़ेगी। मैं बुधवार को इंदौर पहुंच रहा हूं। इस संबंध में सब से चर्चा करके हम अगला कदम उठाएंगे। जहां तक क्षेत्र में रैली निकालने और संगठन से अनुमति लेने का सवाल है तो पार्टी के दो-दो पदाधिकारी रैली में शामिल थे। संगठन को कार्यकर्ताओं की ओर से सूचना दे दी गई थी। पार्टी कार्यालय कोई सरकारी दफ्तर तो है नहीं कि हम अनुमति प्राप्त करें।

माखनसिंहठ्ठ भाजपा के प्रदेश संगठन महामंत्री माखनसिंह ने पार्टी कार्यकर्ताओं के लिए अनुशासन को जरूरी बताया। उन्होंने कहा निषेधाज्ञा के दौरान निकाली गई रैली और शहर इकाई की अनुमति वाले मामले पर विचार किया जाएगा। सारी बातें सामने आने पर पार्टी स्तर पर इसकी चर्चा होगी।

सुमित्रा महाजनठ्ठ सांसद सुमित्रा महाजन ने कहा सोमवार को मालवा-मिल चौराहे पर जो कुछ हुआ उसमें गलती दोनों तरफ से रही। जब पता है कि धारा 144 लगी हुई है तो ऐसे में रैली निकालना ठीक नहीं था लेकिन मेरा सवाल कलेक्टर से भी है कि आखिर उन्होंने ज्ञापन लेने के लिए मालवा मिल चौराहा क्यों तय किया? भाजपा कार्यकर्ताओं को भी पार्टी अध्यक्ष को रैली निकालने के मामले में विश्वास में लेना चाहिए था। मेरी जानकारी में है कि ऐसा नहीं हुआ फिर भी हम प्रशासन की कार्रवाई के विरोध में कार्यकर्ताओं के साथ हुए बर्ताव का विरोध करते हैं। प्रशासन कह रहा है कि किसी ने पत्थर मारा था उसके बाद लाठीचार्ज करना पड़ा। सही-गलत क्या है, मुझे इसकी जानकारी नहीं है। कार्यकर्ताओं के साथ बैठकर बात करेंगे।

संतोष वर्माठ्ठ भाजपा के कार्यवाहक नगर अध्यक्ष संतोष वर्मा ने कहा पार्टी सोमवार के घटनाक्रम के बाद पूरी तरह कार्यकर्ताओं के साथ है लेकिन अनुशासन को लेकर प्रदेश के वरिष्ठ नेताओं को पूरे मामले से अवगत करवा दिया है। मैं कठपुतली अध्यक्ष बनकर नहीं रहूंगा। उन्होंने बताया प्रदेश के नेताओं से जिस तरह के संकेत मिले हैं उनके मुताबिक परिणाम आने के बाद पार्टी हित में कुछ कड़े निर्णय लिए जाएंगे।

मालवा मिल चौराहे पर सोमवार को हुए घटनाक्रम का मामला अब कोर्ट में है इसलिए कुछ भी कहना ठीक नहीं होगा।
- राकेश श्रीवास्तव, कलेक्टर

अब भी जमानत नहीं
सोमवार को मालवा मिल चौराहे हुए प्रदर्शन के दौरान गिरफ्तार किए गए भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं की जमानत मंगलवार को भी नहीं हो पाई। चुनाव के दौरान पुलिस कार्रवाई को एसपी संजीव शमी की ज्यादती करार देते हुए विधानसभा क्षेत्र इंदौर-2 के नेता और कार्यकर्ता सोमवार को बिना अनुमति रैली निकाल रहे थे। इस कारण पुलिस ने 265 कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया। इनमें से 85 महिलाओं को तो मुचलके पर रिहा कर दिया गया लेकिन बाकी को जेल भेजने के आदेश दिए गए।

मंगलवार को जेल में बंद 180 भाजपाइयों की जमानत के लिए सेशन कोर्ट में आवेदन लगाया गया मगर पुलिस की तरफ से पक्ष रखते हुए बताया गया कि इन लोगों से शहर की शांति को खतरा है, अत: इन्हें जमानत न दी जाए। इस पर आवेदन खारिज करते हुए सुनवाई के लिए अगले दिन बुलाया गया।

50 रु. का लालच
मालवा मिल पर एसपी संजीव शमी का विरोध करने के मामले में सोमवार को गिरफ्तार भाजपाइयों को जिला जेल ले जाया गया तो लगभग सभी आनाकानी करने लगे। दरअसल उन्हें उम्मीद नहीं थी कि जेल में बंद कर दिए जाएंगे। बताया जा रहा है कि जेल में प्रवेश करने की बारी आई तो महिला कार्यकर्ता गिड़गिड़ा रही थीं कि उनकी कोई गलती नहीं है। उन्हें तो पचास-पचास रुपए देकर लाया गया था और कहा गया था कि आधे घंटे का काम है। हमें छोड़ दिया जाए, बच्चे घर पर रो रहे होंगे। हालांकि बाद में सभी महिला कार्यकर्ताओं को रिहा कर दिया गया और पुरुष कार्यकर्ताओं को जेल भेज दिया गया।

एसपी की शिकायत
भाजपा की शहर इकाई ने एसपी संजीव शमी की निर्वाचन आयोग से शिकायत की है। पार्टी द्वारा जारी विज्ञप्ति के मुताबिक मतदान के दौरान आम लोगों और मतदाताओं के साथ की गई बदसलूकी के विरोध में भाजपा ने मालवा मिल चौराहे पर शांतिपूर्वक विरोध किया था। इस दौरान जिस तरह की बर्बरता पुलिस ने दिखाई उसकी जितनी निंदा की जाए कम है। इसके बाद जिस तरह कांग्रेस ने एसपी का समारोह पूर्वक सम्मान किया वह आचार संहिता का खुला उल्लंघन है। प्रदेश के मुख्य चुनाव आयुक्त को पार्टी ने इसकी शिकायत कर एसपी के निलंबन की मांग की है। पार्टी ने सोमवार को मालवा-मिल क्षेत्र चौराहे पर राह चलते लोगों के साथ की गई पिटाई को मानव अधिकारों का उल्लंघन करार दिया है।

नाम-पते फर्जी
जिला जेल में गिरफ्तार भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं के प्रकरण बनाए गए तो कई ने नाम-पते गलत लिखवा दिए। इनमें कई तो ऐसे हैं जिन्हें पुलिसवाले जानते भी हैं। जानकारों के अनुसार इनका यह कृत्य जमानत में बड़ा रोड़ा बन सकता है।

पुलिस टीम लिखवाए पते पर जा-जाकर तस्दीक कर रही है। अब तक दो दर्जन से अधिक आरोपियों का वेरिफिकेशन हो चुका है। इनमें सेआधा दर्जन ने नाम-पते गलत लिखवाए हैं। अब पुलिस आरोपियों के गलत नाम-पतों की जानकारी कोर्ट के सामने रखने के साथ अपील करेगी कि वेरिफिकेशन पूरा होने तक इनकी जमानत याचिका मंजूर न की जाए, अन्यथा बाद में इन्हें ढूंढ़ने में तकलीफ आएगी। इसलिए संभव है अब जेल में बंद भाजपाई मतगणना के बाद ही बाहर आ पाएं।





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