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चुनाव विशेष. क्या राजस्थान के मतदाता 2003 के रिकॉर्ड को तोड़कर नया कीर्तिमान स्थापित करेंगे? दिल और दिमाग ही नहीं, आंकड़े भी यही उम्मीद जताते हैं। पिछले पांच विधानसभा चुनावों से मतदान के प्रतिशत में लगातार इजाफा हो रहा है और इसीलिए उम्मीद है कि राज्य की जनता लगातार छठी बार अपने ही रिकॉर्ड को तोड़ देगी।
इस बार उसके सामने चुनौती है 67.18 फीसदी के रिकॉर्ड को तोड़ने की जो गत विधानसभा चुनाव मंे बना था। राज्य में मतदान के प्रति लोगों में जागरूकता लगातार बढ़ती गई है। 1951 में पहले विधानसभा चुनाव में जहां मताधिकार का इस्तेमाल करने वाले लोगों की संख्या महज 32 लाख थी, वहीं 2003 तक आते-आते यह संख्या सवा दो करोड़ को पार कर गई। यह बढ़ोतरी केवल संख्या में ही नहीं है, बल्कि फीसदी में भी है, जो महत्वपूर्ण है।
वर्ष 1951 के चुनाव में करीब 35 फीसदी मतदाताओं ने मताधिकार का इस्तेमाल किया तो वर्ष 2003 के चुनाव में यह संख्या 67 फीसदी तक पहुंच गई, यानी सीधे-सीधे 32 का इजाफा हुआ।
पुरुषों से अधिक जागरूक महिलाएं : राजस्थान के पिछले पांच विस चुनाव के मतदान पैटर्न के अध्ययन से एक बात साफ होती है कि राज्य में मतदान के प्रति पुरुषों की तुलना में महिलाएं कहीं तेजी से जागरूक हो रही हैं। वर्ष 1985 में करीब 61 फीसदी पुरुषों ने मतदान में हिस्स लिया था, जबकि महिलाओं में यह आंकड़ा लगभग 48 फीसदी था। वर्ष 2003 के चुनाव तक आते-आते मताधिकार का इस्तेमाल करने वाले पुरुषों की संख्या बढ़कर 70 फीसदी हो गई, जबकि महिलाओं की संख्या करीब 64 फीसदी।
ऊपरी तौर पर ये आंकड़े यही बताते हैं कि मतदान में पुरुष अब भी महिलाओं से आगे हैं, लेकिन आंकड़ों के अंदर की सच्चई यह है कि पुरुषों की तुलना में महिलाएं अपने पिछले रिकार्ड में कहीं तेजी से सुधार कर रही हैं। बीते पांच चुनावों में पुरुषों के मतदान में करीब 15 फीसदी की बढ़ोतरी हुई (मतदान प्रतिशत 61 से बढ़कर 70 फीसदी हुआ, यह बढ़ोतरी 15 फीसदी के बराबर है), जबकि महिला मतदान में यही बढ़ोतरी 33 फीसदी से भी ज्यादा है (48 से बढ़कर 64 फीसदी)।
राष्ट्रीय स्तर पर भी सुधार
लोकसभा चुनाव में भी मतदान की स्थिति में लगातार सुधार होता आया है। वर्ष 1951 के आम चुनाव में केवल 44.87 फीसदी लोगों ने ही मताधिकार का इस्तेमाल किया था, जो 2004 में बढ़कर 58 फीसदी हो गया। अब तक हुए 14 आम चुनावों में सर्वाधिक मतदान वर्ष 1984 में हुआ था (63.56 फीसदी)। इसके बाद मतदान का प्रतिशत 58 से 60 फीसदी के दायरे में रहा है।
वहां दायित्व है मतदान
कई देशों में मतदान को अधिकार नहीं, दायित्व माना गया है। इनमें बेल्जियम अर्जेटीना, ऑस्ट्रेलिया, ऑस्ट्रिया, ब्राजील, लक्जमबर्ग, स्विट्जरलैंड, सिंगापुर प्रमुख हैं। सबसे पहले बेल्जियम में वर्ष 1892 में मताधिकार को अनिवार्य बनाया गया था।