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Chhattisgarh
Raipur Raipur रायपुर. न्यायालय परिसर में सोमवार को एक बंदी पर कातिलाना हमले के बाद जेल में कत्ल की एक बड़ी साजिश का भांडा फूटा है। पुलिस को ऐसे सुराग मिले हैं कि हत्या के आरोपी कादर को जेल में ही निपटाने की साजिश थी। पारसनगर के गिरोहबाजों ने इसके लिए तगड़ा षडयंत्र रचा था। शनिवार की रात यहां के 16 युवकों का मारपीट करके गिरफ्तार होना उसी साजिश का एक हिस्सा माना जा रहा है। पुलिस अधीक्षक अमित कुमार ने पूरे मामले की जांच के निर्देश दिए हैं।
सूत्रों के अनुसार शनिवार को युवकों ने योजनाबद्घ तरीके से आटो वालों को पीटा और अगले दिन सुनियोजित ढंग से सरेंडर कर दिया। उन्हें यकीन था कि रविवार को छुट्टी के दिन उनकी जमानत नहीं होगी और जेल जाने का मौका मिल जाएगा, पर ऐसा संभव नहीं हो सका। डिप्टी कलेक्टर जयश्री जैन ने उनके केस की सुनवाई की और उन्हें जमानत दे दी। युवकों को कुछ घंटों के भीतर रिहा कर दिया गया।
अफसरों का ऐसा मानना है कि पूरा गिरोह एक साथ जेल में इंटी नहीं कर सका, इस वजह से उनकी योजना फेल हो गई। उसके बाद उन्होंने जेल परिसर में कादर का खून करने का प्लान बनाया। पुलिस ने जिन 16 युवकों को पारसनगर में गिरफ्तार किया था, उनमें अरुण शर्मा भी शामिल था। अरुण सोमवार को न्यायालय परिसर की वारदात में भी शामिल था। वह कादर पर हमला होने के बाद पकड़ा गया। उसके पास से बर्फ की सिल्ली तोड़ने का सूजा भी जब्त किया गया है। कादर पर हमला करने वाला मुख्य आरोपी अभी फरार है। उसने गुप्ती से वार किया था। पुलिस अब पूरे घटनाक्रम के एक-एक लिंक को जोड़कर देख रही है। इस मामले को कादर के केस से भी जोड़कर परीक्षण किया जा रहा है। गवाहों को धमकाने की चर्चाओं की भी बारीकी से पड़ताल की जा रही है।
कादर का घर जलाने की कोशिश
अज्ञात लोगों ने शनिवार की रात कादर के संजयनगर स्थित मकान को जलाकर खाक करने की भी कोशिश की थी। कादर के घर के चारों तरफ पेट्रोल छिड़ककर आग लगा दी गई थी। उस समय कादर के परिवार की तमाम महिला सदस्य घर पर थीं। बताते हैं कि कादर का मकान घनी बस्ती में है। इस वजह से पड़ोसियों ने बदमाशों की हरकतों को पहले ही देख लिया था। आग लगाकर जैसे ही बदमाश वहां से भागे पड़ोसियों ने आग बुझा दी और किसी तरह की जनहानि नहीं हुई। कादर के मकान का गेट ही जलकर खाक हुआ था। गौरतलब है कि कादर पर डेढ़ साल पहले एक हत्या की साजिश रचने का आरोप है।
विभागीय जांच शुरू
जेल विभाग ने भी पूरे मामले की जांच शुरु कर दी है। मुख्यालय के अफसरों ने गिरोहबाजी की शिकायतों के बाद तहकीकात के आदेश दे दिए हैं। एक हफ्ते के भीतर रिपोर्ट मांगी गई है। गिरोहबाजों को प्रश्रय देने के आरोप में कुछ अफसर भी जांच के घेरे में हैं।