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सिंहासन खाली करो कि जनता आती है...

मुंबई. टुकड़े नहीं हमें शांति चाहिए , लाचारी का नाटक देखों , मजबूरी का नाटक देखों , अब और नहीं सहेंगे, अब नहीं रुकेंगे.के नारों के साथ मुंबई में गेटवे ऑफ इंडिया पर हजारों की संख्या में जन सैलाब उपर पड़ा जो मुंबई के गुस्से को और देश के आम आदमी की पीड़ा को बता रहा हैं। मुंबई हमले के लिए नेताओं की लापरवाही के खिलाफ गुस्सा जताने के लिए बुधवार को एक लाख लोग मुंबई की सड़क पर उतर आए। जिसमें बॉलीवुड के बड़े फिल्ममेकर, एड गुरु और और आम आदमी सभी लोग शामिल है। लोगों ने नेताओं और सरकार को जमकर कोसा।

सभी के कदमों की रफ्तार मानो कह रही हो, डाल दो चाहे कितने भी बम, हौसले मुंबई के होंगे न कम। शाम के 6 बजते-बजते गेटवे ऑफ इंडिया के सामने लगभग एक लाख लोग इकट्ठा हो गए और सभी ने आतंकवाद से लड़ने का न केवल संकल्प लिया, बल्कि निकम्मी सरकारों के खिलाफ अपने गुस्से का भी खुलकर इजहार भी किया।

आतंकवादियों और सरकार के खिलाफ नारेबाजी करने के बाद शहीदों और मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि देते हुए लोगों ने फूल चढ़ाए और मोमबत्तियां जलाई।

सिस्टम बदलने का वक्त

लोगों ने जहां आतंकवाद की जमकर आलोचना की है वहीं देश के आम नेताओं की भी जमकर आलोचना करते हुए सिस्टम बदलने की बात कहीं है।

यहीं भीड़ नहीं एक संदेश है

गेटवे ऑफ इंडिया पर जुटे लोगों का गुस्सा और आक्रोश आतंकवाद पर अकुंश लगाने के लिए निर्णायक लड़ाई लड़ने के लिए एक आवाज है जिसको अब अनुसुना करने की हिमाकत कम से कम हमारे नेता तो नहीं कर सकते। इन हाथों में एक ताकत है एकता की, दिल में जोश है अपने वतन पर मर मिटने की जो साफ साफ आवाज दे रहे है । लोगों का स्पष्ट कहना है कि अब वक्त आ गया है कि देश का आम आदमी आतंक के खिलाफ और हर उस बुराई के खिलाफ लड़ने के लिए एकजुट हो और भारत माता की जय बोलते हुए हाथ हाथ मिलाते हुए इस लड़ाई में शामिल हो।

सदियों की ठंढी-बुझी राख सुगबुगा उठी,

मिट्टी सोने का ताज पहन इठलाती है;

दो राह,समय के रथ का घर्घर-नाद सुनो,

सिंहासन खाली करो कि जनता आती है।

रामधारी सिंह दिनकर





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