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जालंधर. वैश्विक मंदी के कारण हजारों लोगों की नौकरियां छिन गई हैं। अकेले जालंधर में ही हैंड टूल इंडस्ट्रीज समेत बाकी इंजीनियरिंग इंडस्ट्रीज से करीब 15 हजार लोगों को नौकरी से जवाब दिया जा चुका है। ईईपीसी(इंजीनियरिंग एक्सपोर्ट प्रोमोशन काऊंसिल) के हैंड टूल पैनल के चेयरमैन शरद अग्रवाल का कहना है कि पिछले करीब चार माह के दौरान अकेली हैंड टूल इंडस्ट्रीज से ही करीब दस हजार लोगों को नौकरी से जवाब दिया जा चुका है।
उन्होंने कहा कि जालंधर के सभी उद्यमी मंदी के भंवर में फंस चुके हैं और सरकार ने अगर जल्द ही इस तरफ ध्यान नहीं दिया तो और लोगों की नौकरियां भी जा सकती है और कई उद्योग बंद हो सकते हैं।
मंदी के चलते हैंड टूल के निर्यात में गिरावट के कारण जालंधर में यह स्थिति बनी है। हैंड टूल के हब के तौर पर जाने जाते जालंधर में हैंड टूल की छोटी बड़ी तीन सौ से ज्यादा इकाइयां हैं और मंदी छाने से पहले इसमें करीब 75 हजार लोग काम करते थे। मंदी के चलते हैंड टूल निर्यातकों को अपनी लेबर कम करनी पड़ रही है।
घरेलू इकाइयों का भी यही हाल है। जालंधर के गदईपुर औद्योगिक क्षेत्र में लगी करीब 200 इंजीनियरिंग इकाईयों से पांच हजार से ज्यादा लोगों की नौकरियां जा चुकी हैं।
गदईपुर के उद्योग नगर मैन्यूफैक्चर्स एसोसिएशन के प्रधान तेजिंदर सिंह भसीन का कहना है कि गदईपुर में करीब पचास फीसदी लेबर की कटौती की जा चुकी है। फैडरेशन आफ जालंधर इंडस्ट्रियल एंड ट्रेडर्स एसोसिएशन्स के प्रधान गुरशरन सिंह का कहना है कि पंजाब सरकार सोई पड़ी है।
शिअद प्रधान सुखबीर कह रह हैं कि पंजाब में मंदी का कोई असर नहीं है। वह पांच सितारा होटलों से इंडस्ट्री में आकर देखें तो उन्होंने मंदी के असर का पता चल जाएगा। सरकार की हालत तो यह है कि उसके पास तो उद्यमियों से बातचीत करने का भी समय नहीं है।
मंदी का असर और बढ़ेगा
शरद अग्रवाल के मुताबिक अभी तक उनके पास पिछले आर्डर थे और उनके कारण उनका काम अभी तक चलता आ रहा था। पुराने आर्डर पूरे होने के कारण अब नए आर्डर मिलने मुश्किल हो रहे हैं। उनके मुताबिक हैंड टूल के आर्डरों में दिसंबर में पिछले साल के मुकाबले करीब चालीस फीसदी की कमी आ चुकी है। हैंड टूल निर्यातक अशोक लक्की का कहना है कि सरकार को इंडस्ट्री को बचाने के लिए उन्हें आर्थिक पैकेज देना चाहिए।