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नई दिल्ली देश में प्रत्येक घंटे में 14 लोग रैगिंग, रिश्तों में नाकामी, बीमारी, दिवालियापन और समाजिक विवादों जैसे अनेक कारणों के चलते आत्महत्या कर लेते हैं। आत्महत्या करने वाले प्रत्येक तीन लोगों में से एक युवक और प्रत्येक पांच में से एक घरेलू महिला होती है।
यह खुलासा राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो की और से दुर्घटनाओं और आत्महत्याओं संबंधी पेश ताजा आंकडों से हुआ है। ‘भारत में दुर्घटना और आत्महत्या से मौतें-2007’ रिपोर्ट के अनुसार पिछले साल आत्महत्या की घटनाओं में 3.8 प्रतिशत इजाफा हुआ है और 1,22,637 लोगों ने अपनी जान गंवाई हैं।
महाराष्ट्र इनमें से सबसे ऊपर है। यहां 15,184 लोगों की आत्महत्या के कारण मौत हुई है। इसके बाद आंध्रप्रदेश 14, 882 मौतों के साथ दूसरे नंबर पर है। रिपोर्ट में कहा गया है कि 264 मौतें या तो सामूहिक समझौते या पूरे परिवार द्वारा की गई सामूहिक आत्महत्या के कारण हुई हैं।
इन में 118 पुरुष और 146 महिलाएं शामिल हैं। ऐसे मामलों में केरल 39 मामलों के साथ सबसे आगे है जबकि आंध्र प्रदेश 34 मामलों के साथ दूसरे नंबर पर है। पारिवारिक समस्याएं और बीमारी आत्महत्याओं का एक बड़ा कारण है। 23.8 प्रतिशत लोग पारिवारिक समस्याओं और 22.3 प्रतिशत लोग बीमारी के कारण आत्महत्याएं करते हैं।
इसी तरह 2.8 प्रतिशत लोग रिश्तों में नाकामी, 2.7 प्रतिशत लोग दिवालिया होने के कारण आत्महत्या करते हैं। 2.6 आत्महत्याएं दहेज के कारण होती हैं। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि बीमारी के कारण आत्महत्या करने वालों 27, 332 लोगों में से 952 लोग एडस या अन्य यौन रोगों के कारण मौत को गले लगा लेते हैं जबकि 794 आत्महत्याएं कैंसर और 496 आत्महत्याएं लकवे के कारण होती हैं।
एडस या अन्य यौन रोगों के कारण आत्महत्याएं करने वालों में 334 महिलाएं शामिल हैं। इस वर्ग में आत्महत्या करने वाले लोग 30 से 44 वर्ष तक के होते हैं। रिपोर्ट के अनुसार इस साल हुई मौतों में सात लड़के और तीन लड़कियां 14 साल से कम थीं। आत्महत्या के लिए ज्यादातर जहर और फंदे का इस्तेमाल किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार आत्महत्या करने वाली महिलाओं में 55.7 प्रतिशत(24,162) घरेलू महिलाएं होती हैं। रिपोर्ट में यह भी खुलासा किया गया है कि आत्महत्या करने वालों में 1.5 प्रतिशत सरकारी नौकरी करने वाले होते हैं जबकि 8.2 प्रतिशत निजी और 2.2 प्रतिशत सार्वजनिक क्षेत्र में काम करने वाले होते हैं।