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Chandigarh Chandigarh चंडीगढ़. लाखों के जाली बिल कैश करवाने के खुलासे से प्रोटोकोल विभाग में हड़कंप मचा हुआ है। अभी तक केवल एक साल के बिलों की जांच हुई है और इनमें से लगभग 44 लाख रुपए के बिल जाली पाए गए। मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्य सचिव ने पिछले सात साल के बिलों की गहन जांच के आदेश दे दिए हैं। यह जांच हॉस्पिटेलिटी डिपार्टमेंट के निदेशक एन.एस. बराड़ कर रहे हैं। इस घपले में पीसीएस रैंक के एक अधिकारी की भूमिका की भी जांच चल रही है।
प्रोटोकोल विभाग के एक अधिकारी ने अपने अधीन काम कर रहे कर्मचारियों के जरिये लाखों के जाली बिल कैश करवा लिए। मामले का खुलासा तब हुआ जब प्रोटोकोल विभाग द्वारा भेजे गए 73 हजार रुपए के बिलों पर हॉस्पिटेलिटी डिपार्टमेंट ने ऐतराज लगा दिया। जांच करने पर पता चला कि यह बिल जाली हैं। संदेह होने पर तीन माह के बिलों की जांच की गई तो करीब साढ़े तीन लाख रुपए के बिल जाली निकले। इनमें ज्यादातर बिल माउंटव्यू होटल के थे।
पिछले एक साल के बिलों की जांच करने पर उनमें से करीब 44 लाख रुपए के बिल जाली पाए गए। जांच के दौरान यह भी पता चला कि स्टेट गेस्ट के रूप में आए जिन लोगों ने अपने क्रेडिट कार्ड से बिल अदा किए, उनके नाम से भी बिल कैश करवा लिए गए। घपले का खुलासा होते ही प्रदेश के मुख्य सचिव आर.आई. सिंह ने दो अधीनस्थ कर्मचारियों को सस्पेंड कर दिया। इन्हीं कर्मचारियों ने बताया कि उन्होंने ऐसा अपने अधिकारी के कहने पर किया है। मुख्य सचिव ने उक्त अधिकारी की भूमिका संदिग्ध मानते हुए पिछले पांच साल के बिलों की जांच के आदेश जारी कर दिए। जांच के लिए माउंटव्यू होटल के पास 22 लाख के और बिल भेजे गए हैं।