|
News
Metros
Chandigarh Chandigarh नई दिल्ली. राजनेता और उनके वर्कर अपने विरोध में मतदान करने वालों वोटरों की पहचान करके उनका उत्पीड़न न कर सकें, चुनाव आयोग ने इसका रास्ता खोज निकाला है। आयोग ने एक ऐसी टोटलाईजर मशीन विकसित करवाई है जिससे इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (इवीएम) में दर्ज मतों को गिनती से पहले मिला पाना संभव होगा। अब तक इवीएम मशीनों के जरिए होने वाली गिनती में यह सुविधा नहीं थी लेकिन टोटलाईजर मशीन के जरिए ऐसा किया जा सकेगा।
आयोग के सूत्रों के मुताबिक, निर्वाचन आयोग की मंशा इस मशीन का प्रयोग सभी निर्वाचन क्षेत्रों में करने की बजाय चुनिंदा क्षेत्रों में ही करने की है। ये वे क्षेत्र हैं जहां आयोग को लगता है कि किसी प्रत्याशी विशेष के खिलाफ वोट करने वाले मतदाताओं का राजनीतिक आधार पर उत्पीड़न या प्रताड़ना संभव है। मतलब साफ है कि मशीन उन नेताओं या बाहुबलियों के लिए सिरदर्द साबित होगी जो बूथवार अपने समर्थकों और विरोधी वोटरों की पहचान करके यह सब करते आए हैं।
दरअसल पहले मतपत्रों के जरिए होने वाले मतदान में भी यह व्यवस्था थी कि किसी भी प्रत्याशी या आम आदमी को इस बात की जानकारी नहीं मिल पाती थी कि किस बूथ से किसे कितने वोट मिले। इसके लिए सभी मतपत्रों को मतगणना से पहले टेबलों पर मिला दिया जाता था। लेकिन इवीएम के चलन में आने के बाद ऐसा करना संभव नहीं हो पा रहा था। कारण साफ है कि इसमें बूथवार लगी मशीनों में दर्ज मतों की गिनती की जा रही थी।
चुनाव आयोग मतदान से लेकर मतगणना तक के काम की गोपनीयता व पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए निरंतर इस प्रयास में था कि इवीएम के जरिए मतदान के बाद भी इसका पता लगने से कैसे रोका जाए कि किस बूथ से किसे कितने वोट मिले। इसी सोच के चलते आयोग ने देश में इवीएम बना रही दोनों कंपनियों बीइएल और इसीआईएल से संपर्क साधा और उन्हें टोटलाईजर की अपनी अवधारणा से अवगत कराया।
दोनों कंपनियों को मशीन के विकास के संबंध में तकनीकी दिशा निर्देश देने के लिए आयोग ने तीन विशेषज्ञों प्रो. पी वी इंदिरासेन, प्रो. डीटी साहनी व प्रो. एके अग्रवाल की सेवाएं लीं। उनके दिशा-निर्देशों के आधार पर तैयार की गई टोटलाईजर मशीनों का पहला प्रदर्शन बुधवार को आयोग के दिल्ली स्थित मुखयालय में देश के सभी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के सामने किया गया। सूत्रों के मुताबिक, प्रदर्शन के दौरान लगभग सभी दलों के प्रतिनिधि मशीन की कार्यप्रणाली और आयोग की अवधारणा से सहमत दिखे।
विभागीय सूत्रों के मुताबिक, राजनीतिक दलों की हरी झंड़ी मिलते ही निर्वाचन आयोग ने मशीन के प्रयोग को वैधानिक रूप देने के लिए इसके प्रयोग का प्रस्ताव केंद्रीय कानून एवं विधायी मंत्रालय को भेज दिया है ताकि टोटलाईजर के प्रयोग को लेकर चुनाव निष्पादन कानून १९६क् की धाराओं में वांच्छित संशोधन किया जा सके। निर्वाचन आयोग को भरोसा है कि मतगणना के लिए टोटलाईजर मशीन के प्रयोग के संबंध में जल्दी ही संशोधन कर दिया जाएगा। हालांकि अभी आयोग के अधिकारी मशीन का प्रयोग शुरू हो पाने में लगने वाले समय के बारे में कुछ भी कहने की स्थिति में नहीं हैं।