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मोटी पगार के साथ जवाबदेही भी

भोपाल. राज्य के कर्मचारियों के लिए आकर्षक तनख्वाह के दरवाजे खोलने वाला छठवां वेतनमान काम के बेहतर रिजल्ट के लिए जवाबदेही का ‘पैकेज’ भी तय करने जा रहा है। छठे वेतन आयोग के बारे में रिपोर्ट देने के लिए बना राज्य वेतन आयोग नए पे-बैंड तय करने के साथ ही जनता से सीधे जुड़े महकमों के कामकाज में कसावट लाने की कवायद में जुटा है। आयोग विभागों से इस बारे में राय ले रहा है कि किस तरह आम लोगों को बेहतर सेवाएं उपलब्ध हो सकें।

केंद्रीय कर्मचारियों के लिए लागू छठे वेतन आयोग की सिफारिशों में बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया है। राज्य वेतन आयोग इसी के मुताबिक ‘टर्म्स ऑफ सर्विस’ के तहत जवाबदेही तय करेगा। आयोग के सूत्रों के अनुसार आम आदमी के सरोकार से जुड़े व मैदानी स्तर पर सेवाएं उपलब्ध कराने वाले स्वास्थ्य व शिक्षा जैसे विभागों के कामकाज को कैसे बेहतर बनाया जाए इसके बारे में भी आयोग रिपोर्ट देगा।

विभागों के अलग-अलग केडर के हिसाब से पे-बैंड तय करने के लिए अफसरों के साथ हो रही बैठकों में कामकाज के बारे में भी में सुझाव लिए जा रहे हैं। मसलन किसी शिक्षक या स्वास्थ्य कार्यकर्ता के कामकाज के बारे में गाइड लाइन तय करने से लेकर लेकर मैदानी अमले का ग्रामीण जनप्रतिनिधियों से तालमेल तक का ध्यान रखने पर विचार हो रहा है ताकि आम लोगों को मिलने वाली सुविधाओं का स्तर और अच्छा हो सके। कर्मचारियों की जवाबदेही से संबंधित अनुशंसाएं वेतमान निर्धारण रिपोर्ट का ही एक हिस्सा होंगी।

रिपोर्ट के लिए काम तेज: वेतन आयोग ने रिपोर्ट तैयार करने के लिए अपनी कार्यवाही तेज कर दी है। रोजाना विभागों के अधिकारियों से चर्चा कर मौजूदा पे-स्केल की विसंगतियों सहित अन्य मुद्दों पर सुझाव लिए जा रहे हैं। सूत्रों के अनुसार मंगलवार तक आयोग राज्य शासन के ५९ विभागों में से ३२ के साथ बैठकें कर सलाह-मशविरा कर चुका है। रिटायर्ड आईएएस अधिकारी एके अग्रवाल की अध्यक्षता में गठित आयोग को दिसंबर क्८ तक काम पूरा करना है, हालांकि निर्धारित समय सीमा में काम पूरा नहीं होने पर इसका कार्यकाल कुछ महीने और बढ़ सकता है। कर्मचारियों को बेसब्री से इंतजार
छठे वेतनमान के लाभ के एवज में फिलहाल अंतरिम राहत ले रहे प्रदेश के सात लाख ८३ हजार से ज्यादा कर्मचारियों को केंद्र के समान वेतनमान लागू होने का ब्रेसब्री से इंतजार है। तय होने वाले नए वेतनमान के अनुसार ही कर्मचारियों के एरियर की गणना होना है।

अब यह नई सरकार पर ही निर्भर रहेगा कि वह कर्मचारियों को एरियर का भुगतान कब और कैसे करेगी। विधानसभा चुनाव से पहले राज्य सरकार ने 1 जनवरी 2006 से छठा वेतनमान लागू करते हुए 31 अगस्त 2008 तक की अवधि का बकाया भुगतान करने का निर्णय लिया था। 1 सितंबर 08 से 20 फीसदी अंतरिम राहत मंजूर की है जो आयोग की रिपोर्ट आने और नए वेतनमान का निर्धारण होने तक मिलती रहेगी।





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