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नई दिल्ली. मुंबई हमलों के बाद कंपनियों ने अपनी सुरक्षा व्यवस्था पर ज्यादा खर्च करना शुरू कर दिया है। आलम यह रहा तो देश में प्राइवेट सिक्योरिटी का कारोबार चार वर्ष में 22,000 करोड़ रुपए से बढ़कर 50,000 करोड़ रुपए का हो जाएगा। उद्योग संगठन एसोचैम ने अपने अध्ययन में यह बात कही है।
कापरेरेट्स ने बढ़ाया सुरक्षा बजट
संगठन का कहना है कि मुंबई की आतंकी वारदात के बाद कंपनियां अपने सुरक्षा बजट में 35 से 40 फीसदी वृद्धि की योजना बना रही हैं। मौजूदा हालात में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करना उनकी पहली प्राथमिकता बन गया है।
वर्ष 2012 तक 125 फीसदी वृद्धि दर
उद्योग संगठन के अनुसार यह कारोबार पिछले पांच-सात सालों में २५ फीसदी की दर से बढ़ रहा था, लेकिन वर्ष २क्१२ तक ये १२५ फीसदी वृद्धि दर हासिल कर लेगा।
बीस हजार करोड़ का आयात
ग्यारहवीं पंच वर्षीय योजना में उद्योगों खासतौर से इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र के संभावित विस्तार को देखते हुए सुरक्षा उपकरणों का आयात बढ़ने का अनुमान है। अध्ययन के अनुसार अगले दो वर्ष में करीब २क्,क्क्क् करोड़ रुपए मूल्य के उपकरण आयात किए जा सकते हैं। सुरक्षा उपकरण बनाने वाली विदेशी कंपनियों ने भारतीय बाजार में अभी से व्यावसायिक संभावनाएं तलाशनी शुरू कर दी हैं। एसोचैम के महासचिव डीएस रावत ने कहा है कि देश की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सरकार को इनके आयात शुल्क में ५क् फीसदी कटौती लागू करनी चाहिए।
दो लाख सुरक्षा कर्मियों की नियुक्तियां
‘कंपनियां ही नहीं देशभर के स्कूल, कॉलेज, शापिंग मॉल्स व व्यावसायिक केंद्र भी सुरक्षा व्यवस्था बेहतर करने में लगे हुए हैं। इससे न सिर्फ घरेलू स्तर पर सुरक्षा उपकरणों के निर्माण को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि करीब दो लाख सुरक्षा कर्मियों की भर्ती की जाएगी।’
— डीएस रावत, महासचिव, एसोचैम
सुरक्षा पर नहीं दिया ध्यान तो हो जाएगा चौपट कारोबार
आतंकी हमलों के बाद मुंबई में कंपनियों ने अपना कामकाज दोबारा शुरू तो कर दिया है, लेकिन वे सरकार से सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाने की मांग कर रही हैं। उद्योग के शीर्ष अधिकारियों का कहना है कि इस दिशा में कारगर उपाय न किए गए तो घरेलू कारोबार को भारी क्षति लगने से रोका नहीं जा सकेगा।
‘देश में इसी तरह आतंकी हमले होते रहे तो घरेलू कंपनियों को विदेश से काम मिलना बंद हो जाएगा। विदेशी कंपनियां ऐसे माहौल में यहां निवेश करने से कतराएंगी।’
—क्रिस गोपालकृष्णन, सीईओ, इंफोसिस टेक
‘लोग भले ही कहते रहे हैं कि वे अपना सर्वश्रेष्ठ करने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन यह उस गति से नहीं हो रहा जिससे होना चाहिए था। वरना ऐसी घटनाओं को कम किया जा सकता है।’
—रतन टाटा, चेयरमैन, टाटा समूह
‘हमने कर्मचारियों को मुंबई से न हो कर जाने की सलाह दी है। लेकिन, इन घटनाओं से हमारे भारतीय कामकाज पर फिलहाल कोई असर नहीं पड़ेगा।’
—अधिकारी, जनरल मोटर्स