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भोपाल. शिक्षकों से गैर शिक्षकीय कार्य कराने पर स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव के तेवर तीखे हो चले हैं। विभाग के स्थानीय अधिकारियों को भी यह समझ में आ गया है कि अब शिक्षकों को अटैच रहने देने से काम नहीं चलेगा। इसीलिए शिक्षकों को वापस बुलाने की तैयारी शुरू हो गई है। हालांकि शिक्षकों की वापसी कैसे हो सकेगी, इस संबंध में काई बोलने को तैयार नहीं है।
विभिन्न कारणों से जिले के सरकारी स्कूलों में पढ़ाई प्रभावित रही है। इसका असर इन दिनों चल रही सभी कक्षाओं की अर्धवार्षिक परीक्षा में देखने को मिल रहा है। ऐसा सिर्फ इसलिए हुआ, क्योंकि जुलाई से ही शिक्षकों को चुनाव कार्य के नाम पर अनुविभागीय अधिकारी और तहसील कार्यालय में अटैच कर लिया गया था। ऐसे शिक्षकों ने छह माह से उस स्कूल की सूरत तक नहीं देखी है, जिससे उन्हें हर माह तनख्वाह मिल रही है। अकेले भोपाल शहर में ऐसे साढ़े तीन सौ शिक्षक हैं, जबकि जिले की बात करें तो गैर शिक्षकीय कार्य में अटैच शिक्षकों की संख्या छह सौ से अधिक हो जाती है, लेकिन इस संबंध में विभाग के अधिकारी बात करने को तैयार नहीं हैं।
हाईकोर्ट की गाइड लाइन : बच्चों की पढ़ाई को महत्वपूर्ण मानते हुए हाईकोर्ट गैर शिक्षकीय कार्य में शिक्षकों को न लगाने के निर्देश जारी कर चुका है। यह निर्देश भी सालों पुराने हैं। बावजूद इसके शिक्षकों के अटैचमेंट पर कोई फर्क नहीं पड़ा है। एसडीएम और तहसीलदार भौतिकी, गणित के शिक्षकों को अटैच कर उनसे एकाउंट का काम कराते हैं।
क्या हो रहे प्रयास: स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव मनोज झालानी ने मंगलवार को शिक्षकों के अटैचमेंट को लेकर आदेश जारी किया है। इसके साथ देवास के दो प्राचार्यो पर निलंबन की कार्रवाई भी की गई है। इसके बाद भोपाल जिले के अधिकारी विभिन्न कार्यालयों में अटैच शिक्षकों की खोज खबर में लग गए हैं। सूत्रों के मुताबिक अटैच शिक्षकों को वापस करने संबंधित कार्यालय के अधिकारी को पत्र लिखा जाएगा। इसके बाद भी शिक्षक नहीं लौटे तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी की जाएगी।