|
विशेष. आतंकवाद से जूझ रहे भारत और इस समस्या से सख्ती से निपटने वाले अमेरिका के रवैये को लेकर इन दिनों यह चर्चा जोरों पर है कि आखिर दोनों देशों के मुखियाओं के रुख में ऐसा क्या फर्क है, जो कार्रवाई और परिणामों में इतना अंतर दिखाई पड़ता है।
अमेरिका पर 11 सितंबर 2001 के हमले के बाद राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने और 26 नवंबर 2008 को मुंबई हमले के बाद प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अपने-अपने देश की जनता को संबोधित किया। दोनों नेताओं ने अपने भाषण में आतंकवाद के खिलाफ संघर्ष, संकल्प और सख्ती की बात कही, लेकिन फर्क महसूस हुआ तो दृढ़ता, रुख और इरादे के स्तर पर। यहां पेश है 9/11 और 26/11 की घटनाओं के बाद बुश-मनमोहन सिंह के भाषणों के अंश।
दृढ़ता : ‘9/11 के हमले के बाद हमारी जिम्मेदारी इसका जवाब देने और दुनिया को आतंकवाद रूपी बुराई से मुक्त कराने की है। यह हमारे खिलाफ जंग का ऐलान है। अब यह जंग हम खत्म करेंगे।’ - बुश
‘मैं देश को भरोसा दिलाता हूं कि हम फौरी तौर पर गंभीरता से पुलिस बलों के आधुनिकीकरण का काम करेंगे, ताकि ऐसे खतरों से एकजुटता के साथ सामना किया जा सके।’ - मनमोहन सिंह
संकल्प : ‘हमारी पहली प्राथमिकता दुनिया भर के आतंकी संगठनों को नष्ट करने की होगी। हम उनके कमांड, नियंत्रण, संचार, साजो-सामान और आर्थिक मदद सभी को खत्म कर देंगे।’ - बुश
‘हम अपने पड़ोसी देशों में पनप रहे आतंकवाद के मुद्दे को सख्ती के साथ उनके सामने पेश करेंगे। हम आतंकवादी तत्वों और उनके मददगारों को देश में घुसने से रोकेंगे।’ - मनमोहन सिंह
रवैया : ‘लड़ाई कई मोर्चे पर होगी। इसकी कोई समय सीमा नहीं है। हमें अदृश्य दुश्मन के खिलाफ छोटी जीत से मिशन को आगे बढ़ाना है। हमारी सफलता नजर आएगी और कभी नहीं।’ - बुश
‘मुंबई हमलों जैसी घटनाएं भविष्य में न हों, इसके लिए हम सख्त से सख्त कदम उठाएंगे। हम अपने नागरिकों की सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए यथासंभव उपाय करेंगे।’ - मनमोहन सिंह
इरादे : ‘आतंकवाद के खिलाफ जंग में अग्रणी राष्ट्र होने के नाते हम नई चुनौतियों से निपटने के लिए अपने संबंधों को रचनात्मक दिशा देंगे, मौजूदा मित्र देशों से संबंधों को दोबारा परिभाषित करेंगे।’ - बुश
‘हम देश के नागरिकों की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ होते नहीं देख सकते। आतंकी हमले करने वाले तत्वों, संगठनों और मददगारों की तलाश कर कड़ी सजा देंगे।’ - मनमोहन सिंह